हरदोई। मेडिकल कॉलेज में टीबी व चेस्ट रोगियों की ओपीडी अब जिला क्षय रोग केंद्र में शुरू कर दी गई है। जिला क्षय केंद्र और पल्मोनरी विभाग एक साथ शुरू होने से मरीजों की भागदौड़ बच गई है लेकिन क्षय केंद्र में ओपीडी होने से मरीजों को अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। केंद्र पर स्थान की काफी कमी है। वहीं, निर्माण कार्य के कारण धूल व मिट्टी से भी परेशान होना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज परिसर में संचालित क्षय केंद्र में टीबी क्लीनिक के समकक्ष पल्मोनरी विभाग की शुरुआत कर दी गई है। ऐसे में जिले के करीब साढ़े सात हजार पंजीकृत मरीज और नए मरीजों को अपना इलाज और सरकार से मिलने वाली सुविधाओं के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। एक ही स्थान पर दोनों विभागों का फायदा मिल रहा है। मरीजों की भागदौड़ बच गई लेकिन उन्हें असुविधाएं उठानी पड़ रही हैं।
क्षय केंद्र के 10 कमरों में से तीन कमरे पल्मोनरी विभाग की ओपीडी के लिए दिए गए हैं। पुराने भवन के कारण परिसर न तो हवादार है और न ही अंदर अधिक स्थान है। ओपीडी आने वाले मरीजों को गलियारों में खड़ा होना पड़ रहा है। भवन के पड़ोस में नवीन ट्रॉमा सेंटर का निर्माण भी हो रहा है। इस कारण धूल व मिट्टी भी काफी परेशान किए हुए है।
नवीन भवन बने तो दूर हो समस्या
जिला क्षय केंद्र अब मेडिकल कॉलेज परिसर में है लेकिन उस पर अभी स्वास्थ्य विभाग का अधिकार है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज परिसर में हर जगह नवीन निर्माण करा दिया गया लेकिन क्षय केंद्र का जीर्णोद्धार नहीं हुआ है। भवन की मरम्मत करने का भी प्रस्ताव नहीं बना है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से भवन के निर्माण को लेकर प्रयास नहीं किया गया। ऐसे में अब पल्मोनरी विभाग शिफ्ट होने से मरीजों को अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है।
क्षय केंद्र की मरम्मत के लिए अभी कोई बजट नहीं है। वैसे भी क्षय केंद्र और पल्मोनरी विभाग एक साथ संचालित हो रहे हैं। नया भवन बनाने के लिए सीएमओ से बात की जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज