संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। जनपद में डिप्थीरिया का एक संदिग्ध रोगी मिला है। पुष्टि के लिए नमूना लेकर लखनऊ भेजा गया है। इस वर्ष अब तक 34 बच्चों के नमूने डिप्थीरिया की आशंका में लखनऊ भेजा गया है। इनमें से 11 में डिप्थीरिया की पुष्टि हो चुकी है।
बाढ़ ग्रस्त इलाकों में बीमारियों ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। संक्रामक रोगों के साथ ही अब डिप्थीरिया का भी एक संदिग्ध मरीज मिला है। हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र के ककरा गांव निवासी एक आठ वर्षीय बच्चे में डिप्थीरिया के लक्षण मिले हैं।
इस पर बाल रोग विशेषज्ञ डिप्टी सीएमओ डाॅ. पंकज मिश्रा ने उसका सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजा है। डा. पंकज मिश्रा ने बताया कि बरसात और इसके बाद के दिनों में यह बीमारी फैलने का खतरा रहता है।
ऐसे फैलती है बीमारी
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पकज मिश्रा ने बताया कि डिप्थीरिया की बीमारी कार्नीएम वैक्टीरियम डिप्थीरिया वैक्टीरिया से फैलती है। यह बीमारी बरसात के दिनों में होती है। यह बहुत ही खतरनाक बीमारी होती है। इसमें मृत्यु दर अधिक होती है। इसका इलाज अत्यंत कठिन होता है। इस का टीका तीन नामों से होता है। पेंटा, डीपीटी, टीडी के नाम से आता है।
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बचाव
बीमार बच्चे के मुंह में सफेद रंग की परत का पड़ना।
इसका बचाव टीकाकरण ही है।
यह टीका बच्चों को डेढ़ महीने, ढाई महीने,साढे़ तीन महीना, डेढ़ वर्ष, पांच वर्ष, दस वर्ष की आयु पर लगता है।
गर्भवती महिलाओं को दो बार में लगाया जाता है।
इसकी दवा 100 शैया संयुक्त चिकित्सालय में उपलब्ध है।
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लक्षण
बुखार आने के बाद गले में सूजन होना
खाना-खाने व पानी निगलने में परेशानी होना
पानी-पीने पर नाक से पानी का निकलना
आवाज में परिवर्तन होना
सांस लेने में दिक्कत होना
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यहां पर है डिप्थीरिया का इलाज
डॉ. पकंज मिश्रा ने बताया कि 100 शैया संयुक्त चिकित्सालय में आठ बेड का वार्ड बनाया गया है। यहां पर बीमार बच्चों को भर्ती किया जाता है। इस बीमारी के होने पर सैंपल लखनऊ भेजा जाता है। इस साल में 33 सैॅंपल लखनऊ भेजे गए। जिसमें 11 बच्चे इस बीमारी से ग्रसित होने की पुष्टि की गई। एक डोज दवा की कीमत करीब 20 हजार रुपए होती है।