रूठे मानसून से किसानों की खेत में खड़ी खरीफ की
फसलें सूखने लगी हैं, जिसको लेकर किसान खासे चिंतित नजर आ रहे हैं। आलम यह
है कि बारिश न होने से खेत में खड़ी धान की फसल पीली पड़ने लगी है, वहीं
मक्के की फसल भी सूख रही है।
इतना ही नहीं जानवरों के चारे भी कीड़े
पड़ने लगे हैं, जिससे जानवर भी चारा नहीं खा रहे। हैरत की बात है कि
ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश नलकू प भी खराब पड़े हैं, जिस कारण किसान
सिंचाई के लिए परेशान है। कुदरत की मार से कराह रहे किसानों को राहत मिलती
नजर नहीं आ रही हैै।
गत वर्ष सूखे ने खरीफ की और बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि
ने रवी की फसल को बर्बाद किया था, जिससे परेशान किसान ने किसी तरह कर्जा
लेकर इस बार खरीफ की फसल तैयार की। विलंब से बारिश होने के कारण धान की
रोपाई देर से हुई और जब बारिश की जरूरत हुई, तो तेज धूप से पौधे झुलस रहे
हैं।
अब तो स्थिति यह है कि अधिकांश खेतों मेें धान की पौध पीली पड़ रही,
वहीं मक्के की फसल पानी न मिलने से सूख रही है। दलहनी फसलों में उर्द की
फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। बरसोहिया, सांडी, बिलग्राम,
हरपालपुर, कछौना और बेनीगंज क्षेत्र के सैकड़ों ऐसे गांव हैं, जहां खेत में
खरीफ की फसल बर्बाद हो रही है।
बरसोहिया क्षेत्र में पशुओं के चारे में
तरह-तरह के कीड़े होने के कारण वह भी उनके खाने योग्य नहीं रहा। सूखे तालाब
अफसरों के दावों की पोल खोल रहे हैं। हैरत की बात तो यह है कि जिले में
लगे करीब 625 नलकूपोें में 200 खराब पड़े हैं। जिनकी मरम्मत कराने की जहमत
नहीं उठाई जा रही।
किसान निजी नलकूप चालकों से ऊंची दर पर पानी लेने में अब
अक्षम साबित हो रहा है। कारण साफ है कि दैवी आपदा से पीड़ित अभी भी 70
फीसदी से अधिक किसानों को आर्थिक सहायता की चेक मुहैया नहीं हो पाईं हैं।