विधि-विधान से पूजन कर सुहागिनों ने सोमवार को भी वट
अमावस्या के अवसर पर पति की लंबी आयु की कामना की। इस पूजा को लेकर शहर के
सभी वट वृक्षों पर सुहागिनों की भीड़ सुबह से ही लगी रही।
इस बाबत
शास्त्रों के जानकारों का कहना है कि पौराणिक कथा है जिसमें सावित्री ने
बरगद वृक्ष के नीचे पूजन कर अपने सुहाग की कामना की थी। शास्त्रों के
जानकारों ने बताया कि उसी मान्यता को लेकर सुहागिन महिलाएं इस तिथि को वट
सावित्री व्रत के नाम से पूजन करती चली आ रही हैं और सत्यवान की तरह अपने
अटल सुहाग की कामना करती है।
खासकर इस वृत का नवविवाहिताओं को काफी
प्रतीक्षा रहती है। उसी परंपराओं के अनुसार सोमवार को वट अमावस्या पर
सुहागिन महिलाओं ने धूम धाम से वट सावित्री व्रत कर पूजन किया। सोलह
श्रंगार कर सुहागिन महिलाओं ने परिवार की महिलाओं के साथ पूजन किया।
इस
बाबत शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि वट पूजा का मुहूर्त रविवार की
सुबह नौ बजे लगा था और सोमवार को सुबह तक था, जिसके चलते कुछ परिवारों की
महिलाओं ने जहां रविवार को भी व्रत व पूजन किया, वहीं शेष ने सोमवार को भी
विधि-विधान के साथ वट का पूजन अर्चन किया।