हरदोई। जिले के निवर्तमान प्रधान इन दिनों खासे परेशान हैं। परेशानी की वजह कराए गए कार्याें का भुगतान न हो पाना है। दरअसल कार्यकाल खत्म होने के तीन दिन पहले से ही सर्वर डाउन हो गया और साइट नहीं चल पाई। अब कमान प्रशासकों के हाथ में है और प्रशासक ही भुगतान कर सकते हैं।
जिले में 1306 ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों के निर्वाचित प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर की रात 12 बजे खत्म हो चुका है। इसके साथ ही जिले के सभी 19 विकास खंडों में डीएम अविनाश कुमार के आदेशों पर प्रशासकों की तैनाती भी की गई है।
ग्राम प्रधानों ने दिसंबर में जो कार्य कराए हैं, उनका भुगतान 20 से 22 दिसंबर के बीच किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन इसी बीच सर्वर डाउन हो गया और पंचायत राज विभाग की भुगतान संबंधी साइट ही नहीं चली।
इस कारण पंचायत राज विभाग के अधिकारियों को भी यह नहीं पता चल पा रहा है कि 22 से 25 दिसंबर के बीच ग्राम पंचायतों में कितना भुगतान किया गया।
माधौगंज विकास खंड की ग्राम पंचायत शहब्दा के निवर्तमान प्रधान केपी सिंह ने बताया कि गांव में कच्ची गली का इंटरलॉकिंग ब्रिक्स से करवाया था। जल निकासी के लिए सीमेंट के पाइप डलवाए थे। 22 दिसंबर से ही सर्वर डाउन हो गया और वेबसाइट नहीं चली। इस कारण भुगतान ही नहीं हो पाया।
पिहानी विकास खंड की ग्राम पंचायत पंडरवा किला की निवर्तमान प्रधान केसरी ने पिछले दिनों ही गांव में खड़ंजा की मरम्मत कराई। खराब हैंडपंप दुरुस्त कराए और एक हैंडपंप का रिबोर कराया। लगभग डेढ़ लाख रुपये का भुगतान होना था। साइट नहीं चली, तो भुगतान ही नहीं हो पाया।
पिहानी विकास खंड की ग्राम पंचायत कुरसंडा के निवर्तमान प्रधान जानमोहम्मद ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय में पेयजल की व्यवस्था कराने, शौचालय की मरम्मत कराने व एक नाली का निर्माण कराने का भुगतान हुआ ही नहीं। कार्यकाल खत्म होने से तीन दिन पहले से ही साइट बंद हो गई।
माधौगंज विकास खंड की ग्राम पंचायत रहीमपुर के निवर्तमान प्रधान बालकराम ने बताया कि गांव में आठ कमरे का पंचायत भवन बन रहा है। अधिकांश कार्य हो चुका है। राज्यवित्त से भुगतान किया जाना है, लेकिन साइट न चलने के कारण भुगतान नहीं हो पा रहा है।
जिला पंचायत राज अधिकारी गिरीशचंद्र ने बताया कि कराए गए कार्यों का स्थलीय सत्यापन करने के बाद प्रशासक भुगतान कर सकते हैं, लेकिन इसको लेकर जवाबदेही भी प्रशासकों की ही होगी। प्रधानों का भुगतान जान बूझकर नहीं रोका गया है। तकनीकी समस्या के कारण परेशानी हुई है।