शहर के सांडी रोड स्थित माता श्रवण देवी मंदिर पर शनिवार को धूम धाम केसाथ
वैदिक रीति नीति के अनुसार श्री शतचंडी यज्ञ महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस
मौके पर बनारस से पधारे विद्वान यज्ञाचार्य बच्चन मिश्र ने कहा कि मां
भगवती की आराधना करने से क्लेश का नाश तथा सुख शांति की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि यज्ञ करने से जहां मन मस्तिष्क एवं
वातावरण शुद्ध होता है
वहीं पुण्य की प्राप्ति होती है। आचार्य ने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश
डालते हुए कहा कि यज्ञ करना हमारी परंपरा रही है और यज्ञ के बल पर
सिद्धियों को प्राप्त किया जा सकता है। सुनील शास्त्री ने कहा कि शतचंडी
यज्ञ करने के आसपास का वातावरण पवित्र होेने के साथ भगवती की कृपा की
प्राप्ति होती है। यज्ञ के माध्यम से संपूर्ण मानव
जाति का कल्याण हो जाता
है। बताया कि 25 अक्तूबर को अरणी मंथन के द्वारा अग्नि देव का आह्वान करते
हुए श्री शतचंडी यज्ञ शुरू होगा। इससे पहले महोत्सव के शुभारंभ पर सनत
मिश्र, मनोज शास्त्री, वरुण शास्त्री आदि आचार्यों ने गणेश
पूजन कराते हुए
वैदिक रीति नीति के अनुसार पंचांग पूजन, कलश पूजन आदि कार्यक्रम संपन्न
कराए। कार्यक्रम केयजमान रवींद्र नाथ सेठ ने पूजन किया। इसके बाद महंतों ने
महामाई की महिमा का वर्णन करते हुए श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया। इस
मौके पर काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
देश के लिए लाभकारी होगा अश्वमेघ यज्ञ
कस्बे में होने वाले अश्वमेघ यज्ञ का लाभ पूरा देश को पहुंचेगा।
यह आयोजन राष्ट्र को समर्पित होगा। ये विचार अश्वमेघ यज्ञ को लेकर आयोजित
विचार गोष्ठी में राधाकांत शुक्ला ने व्यक्त किए। गायत्री प्रज्ञा पीठ
पर आयोजित विचार गोष्ठी में राधाकांत शुक्ल ने कहा कि पर्यावरण समस्या आज
विश्व संकट बन गई है। ऐसे में परिशोधन के प्रमुख अस्त्र अश्वमेघ यज्ञ
को
प्रखर बनाने की आवश्यकता है। इसका अनुष्ठान राष्ट्र की अखंडता के लिए किया
जाता है। इसका लाभ पूरे देश को मिलेगा। इस यज्ञ के जरिए वातावरण के सूक्ष्म
प्रदूषण से छुटकारा मिलेगा। गौरव कपूर ने कहा कि देवभूमि भारत के
स्वर्णिम
अतीत के निर्माण में जो प्रक्रियाएं क्रियाशील रहीं हैं, अश्वमेघ उनमें
विशिष्टतम है। संयोजक अतुल कपूर ने जानकारी दी कि 29 अक्तूबर को कार्यकर्ता
सम्मेलन होगा, जिसे गायत्री तपोवन हरिद्वार के ट्रस्टी गंगा सिंह टोली के
साथ संबोधित करेंगे। गोष्ठी में सनीत वाजपेई, दिनेश गुप्ता व अमित मिश्रा
आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।