तीन माह पूर्व प्रधानमंत्री ने पूरे देश में स्वच्छता
अभियान शुरू किया था। स्वच्छता का संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने सभी को
अपने घर और बाहर की साफ सफाई रखने की बात कही। स्वच्छता अभियान की शुरुआत
के दौरान तो लोगों ने इस मिशन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और स्वच्छता में
सहयोग दिया, पर फिर यह अभियान सिर्फ चर्चाओं तक सिमटता जा रहा है।
आलम यह
है कि जिनके ऊपर लोगाें को इस ओर जागरूक करने की जिम्मेदारी है उनके
कार्यालयों में ही स्वच्छता अभियान कागजों तक सिमट रहा है। सरकारी
कार्यालयों के आस पास लगा रहने वाला कूड़ा कचरा जिम्मेदारों को आईना दिखा
रहा है।
यह कार्यालय तो महज बानगी हैं, जहां साफ सफाई को लेकर अभी भी
उदासीनता बरती जा रही है, सच्चाई तो यह है कि साफ सफाई करने वालों ने जहां
कुछ समय पहले काफी उत्साह व जोश नजर आ रहा था। वो जोश और उत्साह अब नजर
नहीं आ रहा, जिससे कार्यालय ही नहीं शहर की तमाम सड़कों और गलियाें में
कूड़ा व कचरा नजर आ रहा है।
जागरूकता के अभाव में लोगाें ने अपने घर की
गलियों और सड़कों को साफ करना उचित नहीं समझा है। स्वच्छता अभियान से लोगों
ने कितना संदेश लिया है यह कूड़ा कचरा के ढेर बता देते हैं। स्पष्ट है कि
जब तक लोगों में स्वयं के प्रति जागरूकता नहीं होगी तब तक स्वच्छता अभियान
सार्थक भी नहीं हो सकेगा।
उधर, इस बाबत जिलाधिकारी रमेश मिश्रा कहते हैं कि
स्वच्छता के प्रति सभी लोग जागरूक हो और सार्वजनिक स्थानों के साथ ही अपने
आसपास के सभी परिसरों को साफ सुथरा बनाए रखने में सहयोग करें।
डीएम
कार्यालय के पास कूड़ा पड़ा हुआ है। वैसे तो सामान्य रूप से यहां हर रोज
साफ सफाई होती है, मगर इसके बाद भी कहीं न कहीं कूड़ा कचरा छूट जाता है।
जिसके कारण जिस किसी की भी इस कूड़े कचरे पर नजर पड़ती है तो वो यही सोचने
लगता है कि साफ-सफाई में जब यहां लापरवाही हो रही है, तो फिर आम जगहों का
क्या हाल होगा।
कलक्ट्रेट के पास स्थित
विकास भवन में कई विभागों के दफ्तर हैं। साफ सफाई के नाम पर यहां झाडू़ तो
रोज लगती है, पर विकास भवन के प्रथम तल तथा द्वितीय तल स्थित शौचालयों की
स्थित किसी से छिपी नहीं है। साफ सफाई में कोताही के चलते जहां वहां पर
जगह-जगह गंदगी नजर आती है, तो वही बदबू से माहौल भी खराब होता है।
यह हालत
तब है, जब यहां पंचायत राज विभाग का कार्यालय भी है और स्वच्छता के नाम
यहां हर साल करोड़ों खर्च होते हैं और सैकड़ों सफाई कर्मी हैं। इसके बाद भी
यहां साफ सफाई की हालत काफी खराब है।
सर्व
शिक्षा अभियान में करोड़ों रुपये खर्च करने के साथ स्कूलों में स्वच्छता
का संदेश देने वाला बीएसए कार्यालय खुद ही स्वच्छ और सुंदर बनने की राह देख
रहा है। बीएसए कार्यालय में स्वच्छता अभियान को लेकर कर्मचारी और अधिकारी
कितना जागरूक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार्यालय
परिसर के भीतर ही गंदगी के ढेर लगे हें और जिम्मेदार बेखबर बने हुए हैं।
जिला
अस्पताल में भी स्वच्छता को लेकर कोई खास जागरूकता नहीं है। साफ-सफाई को
लेकर विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिससे इधर-उधर कूड़ा करकट पड़ा रहता है
और जिम्मेदार बेखबर बने रहते हैं। यह अलग बात है कि जिला अस्पताल में कई
स्थानों पर कूड़ा करकट बाक्स लगे होने के बाद भी लोग कूड़ा कचरा इधर उधर
फेंकते हैं।
जनता से जुड़ा प्रमुख
विभाग एआरटीओ कार्यालय में हर कार्यदिवस में बडे़ पैमाने पर लोगों का आना
जाना रहता है। यहां भी स्वच्छता को लेकर लोगों में जागरूकता नहीं है। जिसका
जहां मन होता है, वहां थूक देता है और जहां मन चाहा कूड़ा डाल दिया जाता
है। लिहाजा साफ सफाई व्यवस्था चौपट नजर आती है।