हरदोई। हुजूर 27 साल से हर तारीख पर अदालत आते हैं। इतने साल तक मुकदमा लड़ना ही सजा जैसा है। यह पहला अपराध है। न पहले कभी कानून तोड़ा और न ही आगे ऐसा कुछ करेंगे। पिटाई के 27 साल पुराने मामले के आरोपियों की इस दलील को सिविल जज जूनियर डिवीजन विशाल दीक्षित ने स्वीकार कर लिया। सिविल जज ने तीन सगे भाइयों को दो वर्ष की परिवीक्षा पर छोड़ दिया है। हालांकि साथ में तीनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
अतरौली थाना क्षेत्र के कोल्होरा भटपुर निवासी रामपाल ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि तीन नवंबर 1998 को भैंस चराकर घर वापस आ रहा था। गांव के चरन सिंह के घर के बाहर पहुंचा था कि उसने भैंस के लाठी मार दी थी। मना करने पर गाली गलौज किया था। विरोध पर चरन ने अपने भाइयों करन और छोटक्के के साथ उसकी पिटाई कर दी थी। इसमें उसका हाथ भी टूट गया था। इसके बाद मामला थाने और फिर अदालत तक पहुंचा। अभियोजन पक्ष की ओर से तीन गवाहों को पेश किया गया। दोनों पक्षों की तर्को को सुनने के बाद अदालत ने टिप्पणी की कि लंबे समय तक मुकदमे का सामना करना भी अपने आप में दंड है। तीनों आरोपियों को दो वर्ष की परिवीक्षा सुनाई है। इस दौरान हर माह तीनों को जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय में हाजिरी लगानी होगी।