राम जानकी मंदिर में चल रही श्री राम कथा का वर्णन
करते हुए आचार्य संतोष भाई जी ने कहा कि इंद्रियों पर संयम रखने से प्रभु
श्रीराम का हृदय में प्राकट्य होता है। कहा कि अहिल्या के दोष को प्रभु
श्रीराम ने अपनी कृपा से पावन बना दिया। श्रीराम जी ने सदैव अपने स्वजनों
को सुख प्रदान किया।
उनके स्वभाव को जानकर जीवन पाप एवं दोष मुक्त हो जाता
है। कहा कि भगवान का नाम कलियुग में पाप मुक्त करने वाला है। उन्होंने
कहा कि भगवान का नामकरण संस्कार वशिष्ठ जी ने करवाया, गुरु विश्वामित्र ने
श्रीराम द्वारा ताड़का और मारीच को सद्गति प्रदान की।
उन्होंने ताड़का को
दंभ बताते हुए कहा कि व्यक्ति आडंबर करता है, तो उस आडंबर को पतन का हेतु
बनना पड़ता है। आचार्य ने मां जानकी को भक्ति का स्वरूप बताते हुए कहा कि
जहां भक्ति है, वहीं भगवान को आना पड़ता। जैसे धनुष यज्ञ में भगवान श्रीराम
को सीता सदन में ठहरना पड़ा।
उन्होंने परशुराम को क्रोधावतार बताया। समय
समय पर अत्याचार के विनाश को भगवान को क्रोधावतार लेना पड़ता है। धनुष
टूटने के बाद सीता श्रीराम के गले में वरमाला डालती हैं, वहीं अयोध्या से
आई बारात का राजा जनक भव्य स्वागत करते हैं।
उधर, राम बारात राधाकृष्ण
मंदिर रेलवेगंज से शुरू होकर श्रीराम जानकी मंदिर पहुंची। पूर्व
पालिकाध्यक्ष उमेश अग्रवाल, राकेश अग्रवाल ने बारात अगवानी की। सोमेंद्र
अग्रवाल ने श्रीराम जी को तिलक लगाया। इस मौके पर अपूर्व माहेश्वरी,
सत्येंद्र गुप्ता, आनंद शुक्ल, मनीष सिंह, अनूप सिंह, केएस बाजपेयी, रेखा
श्रीवास्तव, सीमा जायसवाल आदि मौजूद थे।