हरपालपुर में मकान पर कब्जेदारी के विवाद में बृहस्पतिवार सुबह 15 लोगों ने चाय-पकौड़ी बेचने वाले दुकानदार के घर पर घुसकर लाठी-डंडों से पीट-पीट कर हत्या कर दी।
हमलावरों से पति को बचाने दौड़ी पत्नी और पुत्र को भी लाठियों से पीटा। घटना से आक्रोशित व्यापारियों ने हरपालपुर मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। लगभग एक घंटे बाद रिपोर्ट दर्ज होने और एसपी के मौके पर पहुंचने पर जाम खुला। पुलिस ने दो महिलाओं सहित तीन को गिरफ्तार कर लिया।
हरपालपुर कस्बे में मुख्य बाजार में विकास मिश्रा (45) पुत्र महेंद्र मिश्रा चाय और पकौड़ी की दुकान लगाते थे। दुकान के पीछे उनका मकान था।
सुबह छह बजे कोतवाली क्षेत्र के ग्राम ईसेपुर निवासी वीरेश, सतेंद्र, दुष्यंत और संजय पुत्र पातीराम, संगीता पत्नी संजय, विद्यावती पत्नी विश्राम, रामबाबू और श्यामबाबू पुत्र अमर सिंह व वेदप्रकाश पुत्र खुमानी निवासी सांडी पांच अन्य अज्ञात लोगों के साथ विकास के घर पर पहुंचे और घर का सामान उठाकर बाहर फेंकना शुरू कर दिया।
विकास ने आपत्ति जताई तो लाठी-डंडों से हमला कर दिया। विकास के सिर में लाठी लगने से वह गिर गया और मौके पर ही मौत हो गई। बीच-बचाव को पहुंची विकास की पत्नी सुधा और बेटे अंकित पर भी हमला कर दिया।
इस बीच शोर-शराबा सुनकर कस्बा वासी मौके पर एकत्र हो गए तो हमलावर फरार हो गए। लोगों ने भाग रहे वेदप्रकाश, संगीता और विद्यावती को पकड़ लिया। सूचना पर यूपी 100 की बाइक से दो सिपाही मौके पर पहुंचे, पर भीड़ ने दोनों को दौड़ा लिया।
घटना से गुस्साए लोगों ने व्यापारियों के साथ हरपालपुर कस्बे की बाजार में जाम लगा दिया। जाम की सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की।
इस पर लोनार, पाली, सांडी, बेहटा गोकुल और अरवल से भी पुलिस बल बुलाया गया। एसडीएम सवायजपुर उदयभान सिंह, एएसपी पश्चिमी त्रिगुण विसेन और तहसीलदार सवायजपुर मूसाराम थारू भी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाया, लेकिन लोग नहीं मानें।
एक घंटे बाद एसपी आलोक प्रियदर्शी मौके पर पहुंचे और जाम लगाए लोगों से बातचीत की। एसपी ने तत्काल रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद जाम खुला।
एसपी ने बताया कि मृतक के साले रतीराम की तहरीर पर नौ नामजद और पांच अज्ञात पर भी रिपोर्ट दर्ज की गई है। बताया कि तीन हत्यारोपियों वेदप्रकाश, विद्यावती और संगीता को गिरफ्तार किया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
300 मीटर की दूरी एक घंटे में तय कर पाई पुलिस
हरदोई। गुरुवार को हरपालपुर कस्बे में दुकानदार की हत्या के बाद माहौल बिगड़ने के लिए हरपालपुर कोतवाली पुलिस को जिम्मेदार माना जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों और विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जब विकास के घर पर हमला बोला गया तो वह दौड़कर हरपालपुर कोतवाली पहुंचा और वहां घटना की जानकारी दी। कोई सुनवाई न होने पर वह वापस मकान पर पहुंचा।
घटनास्थल और कोतवाली के बीच दूरी महज 300 मीटर की है, लेकिन इस दूरी को तय करने में यूपी 100 की बाइक टीम को एक घंटा लग गया। नतीजा यह हुआ कि जब तक पुलिस टीम पहुंची तब तक विकास की जान जा चुकी थी और यही कारण रहा कि ग्रामीणों ने बाइक सवार सिपाहियों को मौके से दौड़ा लिया।
मकान पर कब्जेदारी का विवाद यूं तो लगभग चार वर्ष से था, लेकिन पिछले एक वर्ष से तनाव अधिक हो गया था। विकास अपनी पत्नी सुधा और पुत्र अंकित व पुत्री प्रियंका के साथ दिल्ली में रहकर चाय-पकौड़ी बेचता था। हरपालपुर में उसके पिता महेंद्र मिश्रा छोटे भाई रामजी मिश्रा के साथ रहते थे।
लगभग चार वर्ष पहले रामजी मिश्रा ने अपने पिता से आधे मकान का बैनामा ईसेपुर निवासी सतेंद्र की मां बलकोरा को करा दिया। इस आधे मकान पर सतेंद्र का परिवार अब भी काबिज है और इसमें उसका ताला पड़ता है। लगभग ढाई साल पहले मकान के बचे हुए हिस्से को भी रामजी ने बलकोरा के नाम लिख दिया।
इसकी जानकारी होने पर विकास दिल्ली से आया और पैतृक संपत्ति में आधा हिस्सा होने की बात कहकर आधे हिस्से में काबिज हो गया। लगभग एक वर्ष पहले महेंद्र मिश्रा की मौत हो गई तो सतेंद्र और विकास के बीच विवाद तूल पकड़ गया।
आए दिन दोनों पक्षों के बीच विवाद होता था, लेकिन पुलिस हर बार मामला टाल देती थी। विकास ने उक्त मामले में दीवानी न्यायालय में वाद दायर कर रखा है। अगर हरपालपुर पुलिस ने शुरू से ही सावधानी बरती होती तो शायद गुरुवार सुबह यह घटना न होती।
चार दिन पहले ही हुई थी विकास के दामाद की मौत
विकास ने अपनी पुत्री प्रियंका की शादी फर्रुखाबाद निवासी प्रमोद के साथ कर दी थी। प्रियंका और प्रमोद के डेढ़ वर्षीय पुत्र भी है। चार दिन पहले प्रमोद की मौत हो गई थी। इसके बाद विकास वहां से अपने नाती को ले आया था। गुरुवार सुबह हुई घटना में विकास की भी मौत हो गई।
मृतक के पिता की भी हुई थी संदिग्ध हालात में मौत
गुरुवार की सुबह की घटना में जिस विकास मिश्रा की हत्या की गई, उसके पिता महेंद्र मिश्रा की मौत भी लगभग एक साल पहले संदिग्ध हालात में हुई थी।
तब विकास ने जहर खिलाकर पिता महेंद्र मिश्रा की हत्या किए जाने का आरोप लगाया था। शव के पोस्टमार्टम में मौत का कारण पता न चलने पर बिसरा सुरक्षित कर लिया गया था, लेकिन मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी। तब घटना को इसी मकान को लेकर चल रहे विवाद से जोड़कर देखा गया था।
विकास मिश्रा की फाइल फोटो।- फोटो : HARDOI