सावन मास में अंतिम सोमवार के बाद गुरुवार को पड़ी
शिव त्रयोदशी का पर्व जिले भर में पूर्ण श्रद्धा और उत्साह के बीच धूमधाम
से मनाया गया।
पूरे सावन मास में ही शिव पूजा का अपना एक अलग महत्व है।
कहा जाता है कि शिव सभी भगवानों में सबसे पहले प्रसन्न एवं फल देने वालों
में से हैं। सावन मास में तो उनकी कृपा और अधिक बढ़ जाती है। विधिवत पूजन
करने से कोई भी श्रद्धालु मन वांछित फल को अवश्य पा लेता है। ऐसा माना जाता
है।
बहरहाल सावन के सोमवार का व्रत और पूजन को तो फलदायी बताया ही जाता
है। इसके अलावा आखिरी सोमवार को पड़ने वाले शिव त्रयोदशी को लेकर भी कई
मान्यता प्रचलित हैं। शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि सावन माह के
सोमवार के बाद त्रयोदशी का सबसे बड़ा महत्व होता है।
इस दिन विधि विधान से
व्रत और पूजन करने वालों से सभी प्रकार की बीमारियां दूर भागती हैं, तो घर
में भी किसी प्रकार का भी क्लेश नहीं होता है। इसी तथ्य को मानते हुए
तथा भगवान शिव की कृपा पाने के लिए गुरुवार को घरों से लेकर मंदिरों तक में
भगवान शिव का विधिवत पूजन अर्चन किया गया।
लोगों ने व्रत रखकर घर में सुख
समृद्धि व शांति की कामना की। त्रयोदशी के चलते विश्वनाथ मंदिर, शिव भोले
मंदिर, मौनी बाबा मंदिर, सुनासीर नाथ मंदिर, मंशानाथ मंदिर, नील
कंठेश्वरनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के द्वारा पूजन अर्चन का कार्यक्रम दिन
भर चलता रहा।
उधर, गायत्री प्रज्ञापीठ रेलवेगंज पर सामूहिक रूप से
रुद्राभिषेक कराते हुए गायत्री परिवार के वरिष्ठ परिजन आरबी शर्मा ने कहा
कि भगवान शिव रुद्राभिषेक से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों को
अनुदान, वरदान देते हैं। इस दौरान सर्व प्रथम पूजन गणेश जी का हुआ उसके बाद
मां गौरी का किया गया।