बाबा नील कंठेश्वर नाथ मंदिर में पूजन करने को लगी श्रद्धालुओं की भीड़।
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हरदोई। सावन के पहले सोमवार का भोर से ही शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालु बम बम भोले की जयकार करते हुए अंदर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा की। देर शाम तक शिव मंदिरों में ‘शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ...’े भजन गूंजते रहे। मंदिरों के आसपास सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात रहा।
जिले के सकाहा मंदिर, सुनासीर नाथ मंदिर, बाबा विश्वनाथ, तुंरत नाथ मंदिर, बूढ़े बाबा मंदिर, शिव भोले मंदिर आदि मंदिरों में भगवान शिव के पूजन-अर्चन को भक्तों का जमावाड़ा लगा रहा। बेलपत्र, धतूरा, दूध आदि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा की गई।
कई मंदिरों के आसपास मेला भी लगा। सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए मंदिरों में पुरुष पुलिसकर्मियों के साथ महिला पुलिस कर्मी भी तैनात की गईं थीं। शास्त्री उमाकान्त अवस्थी का कहना है कि धर्म शास्त्रों में सावन को श्रावण भी कहा जाता है।
श्रावण का अर्थ है सुनना, इसलिए यह भी कहा जाता है कि इस माह में सत्संग, प्रवचन व धर्मोपदेश से विशेष फल मिलता है। यह माह भगवान शंकर की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। सावन में ही कई प्रमुख त्योहार जैसे हरियाली अमावस्या, नागपंचमी व रक्षाबंधन आदि आते हैं।