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दूल्हे की शेरवानी, दुल्हन का लहंगा, खूब महंगा

Fri, 16 Jan 2015 11:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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दिलों के बंधनों में पंडित जी के मंत्र मायने नहीं रखते, हम आप क्या बांधेंगे बंधन-रिश्ते तो ऊपर से ही बंध कर आते...। यह पंक्तियां शुरू हुई सहालग की धूम और उसमें भी भारी पड़ रही वक्त की कमी पर खूब सटीक बैठ रही है। फिर भी विवाह लग्नों के आगमन पर जिले में वर वधू पक्ष की तैयारियां पूरी जोश व उत्साह के साथ शुरू हो गई हैं, तो दूसरी ओर सात फे रे संपन्न कराने वाले पंडित जी ने भी वक्त की कमी बता अपना शेड्यूल जारी कर दिया है।
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बताया गया कि 16 जनवरी से विवाह आयोजनों की शुरुआत हो चुकी हैं। शहनाई की गूंज कानों में पड़ने लगी है तो वर एवं वधू पक्ष के लोगों ने अपनी अपनी मांगलिक तिथियों को विचरवाने के बाद तैयारियां शुरू कर दी है। वर व कन्या दोनों ही पक्षों को जहां इस बार तैयारियों में सबसे अधिक परेशानियां आ रही हैं, वह है गेस्ट हाउस से लेकर बैंड बाजे की बुकिंग की।

तो दूसरी सबसे बढ़ी परेशानी पंडित जी पैदा कर रहे हैं, क्योंकि जिलों के जाने माने पंडित जी ने अपने अपने बुकिंग व समय के अनुसार शेड्यूल जारी कर दिए हैं। तारीख विचरवाने के बाद उनका तुरंत अपना शेड्यूल देखना होता है। यदि खाली है तो ठीक वरना पंडित जी दूर से हाथ जोड़ रहे हैं। इस बाबत पंडित उमाकांत शास्त्री एवं सुनील शास्त्री कहते हैं  कि जनवरी माह में सिर्फ पांच लग्न हैं।
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बताया कि उनमें भी सबसे अधिक 29 जनवरी की लग्न तेज है। यही कारण है कि इस लगन पर सबसे ज्यादा आयोजन विवाह के हो रहे है। हमारे ज्यादातर जजमानों ने इस लगन पर विवाह कार्यक्रम निश्चित किए, जिससे हमें हम सभी जजमानों के यहां पहुंचने में मुश्किलें हो रही हैं। जिसके लिए कही हम अपने साथियों को भेज रहे हैं तो कहीं शिफ्ट वाइज कार्यक्रम संपन्न कराने को यजमानों की स्वीकृति ले रहे है।

जनवरी में 16 जनवरी के बाद 18, 24, 25 एवं 29 जनवरी की तिथियां खास हैं, जबकि फरवरी में सात, आठ, 11, 12, 14, 15, 16, 20, 21, 26 एवं 27 फरवरी मुख्य हैं, पर 14 फरवरी को लेकर काफी मांग हो रही है। उधर, सहालग की धूम है, इसलिए बाजारों में रौनक है। वर पक्ष हो या फिर कन्या।

हर दुकान व शो रूम पर इनकी दस्तक है। यही कारण है कि मांग बढ़ने के बाद महंगाई का पारा काफी ऊपर पहुंच गया है। महंगाई का तापमान तमतमाने से बाबुलों को खासा पसीना आने लगा है। दूल्हे की शेरवानी से लेकर दुल्हन का लहंगा बहुत महंगा हो चुका है।

उधर, वैसे तो विवाह कार्यक्रम संपन्न कराने में पंडित जी को करीब दो से साढ़े तीन घंटे लगते हैं, पर लगन बड़ी होने से जिन पंडित जी ने अपना समय तय किया है, उसके अनुसार वह यदि मंत्रों को हाई स्पीड में पढ़े तो हैरान न हों, क्योंकि अबकी पंडितों की मांग ज्यादा होने पर वह भी शादियों को मैनेज करते नजर आएंगे।
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