फोटो-14- शबे रात पर कब्रिस्तान में फातिहा पढ़ते लोग। संवाद
पिहानी। शब-ए-बरात पर पूरी अकीदत और एहतराम के साथ रात भर इबादत का दौर चला। इस दौरान रो-रोकर गुनाहों की माफी मांगी गई। पूर्वजों की कब्रों पर फातिहा पढ़ने वालों का तांता लगा रहा।
मंगलवार शाम सूरज ढलते ही मस्जिदों में चहल-पहल शुरू हो गई। कटरा बाजार स्थित जामा मस्जिद समेत सभी प्रमुख मस्जिदों में मुस्लिमों ने पूरी रात जागकर नफिल नमाजें अदा कीं और कुरान की तिलावत की। कई जगह जलसे हुए जिनमें उलेमा ने इस रात की फजीलत बयान करते हुए बताया कि यह रात गुनाहों से तौबा और खुदा की रहमत पाने की रात है। शब-ए-बरात पर पूर्वजों को याद करने की परंपरा के चलते शाम से ही कब्रिस्तानों में भीड़ जुटने लगी थी। लोगों ने अपनों की कब्रों पर फातिहा पढ़कर उनकी मगफिरत के लिए दुआएं मांगी।
शिया जामा मस्जिद और करावां रोड स्थित शिया कब्रिस्तान में रोशनी और खुश्बू की गई। लोगों ने कब्रों पर फूल सजाए और अगरबत्ती जलाकर उनकी मगफिरत की दुआएं कीं। इस दौरान बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की आंखें नम थीं। मोहल्ला कोट में कैफी जैदी के आवास पर जश्ने कायम मनाया गया जिसमें शायरों ने कलाम पेश किया। कुछ घरों में विशेष पकवान और हलवा बनाकर गरीबों व रिश्तेदारों में तकसीम किया गया तो ज्यादातर जगह सादगी से इबादत की गई। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस मुस्तैद रही। प्रमुख चौराहों और मस्जिदों के आसपास पुलिसकर्मी सक्रिय रहे। पुलिस टीमें लगातार गश्त पर रहीं।
नगर पालिका की ओर से सफाई व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट पर विशेष ध्यान दिया गया जिससे अकीदतमंदों को असुविधा का सामना न करना पड़े। अगले दिन बुधवार को रोजा रखकर रोजेदार दिन भर इबादत में रहे। मगरिब अजान के साथ इफ्तार करके रोजा खोला गया। उलेमा ने कहा कि अब यहां से रमजान महज 15 दिन दूर है। इबादतों के लिए कमर कस लेना चाहिए।