शारदीय नवरात्र उत्सव के आठवें दिन तिथि एवं आचार्यों के अनुसार इस वर्ष
माता के सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा अर्चना की गई। मंदिरों से लेकर
घरों तक में पुरोहितों ने मां का पूजन कराते हुए मां भगवती के सातवें
स्वरूप कालरात्रि की महिमा को बताई। कहा कि इनकी आराधना करने से समस्त
प्रकार के भय का नाश होता हैं और सर्व मनोकामना पूर्ण होती हैं।
मान्यता
है कि शारदीय नवरात्र में मां की आराधना करने से लोगों के सभी कष्ट दूर
होते हैं और लोगों को सुख शांति की प्राप्ति होती हैं। वैसे तो शारदीय
नवरात्र उत्सव का मंगलवार को आठवां दिवस है मगर तिथियाें एवं घड़ियों के
अनुसार मां के कालरात्रि स्वरूप का दिन बताया गया जिसके अनुसार उनकी पूजा
अर्चना की गई। शास्त्रों केअनुसार मां कालरात्रि का
स्वरूप अंधकार की तरह
काला हैं तथा इनके कंठ में चमकीली मुंडों की माला हैं। यह अपने भक्तों को
सभी कष्टों से मुक्ति दिलाती हैं। भक्त देर रात्रि तक इनकी आराधना करते
हैं। यह अपने भक्तों की हर तरह से रक्षा करने वाली देवी हैं। भक्तों को भय
दूर करने वाली हर संकट हरने वाली तथा दुष्टों को नाश करने वाली देवी मां
कालरात्रि की हर तरफ जय जयकार हो
रही हैं। नवरात्र के दौरान नियम एवं संयम
से मां की आराधना करनी चाहिए। मान्यता है कि मां के सच्चे दरबार में अर्जी
लगाने वालों की अरदास अवश्य पूरी होती हैं। सुख समृद्धि की कामना के साथ
मां के भक्तों ने मां की आराधना की। मां कालरात्रि को भय नाश एवं संकट मोचक
देवी माता के रूप में जाना जाता हैं।
कालरात्रि की आराधना मिलती हैं सर्वसिद्धि
आचार्य अशोक मिश्रा ने मां भगवती के सातवें स्वरूप कालरात्रि की महिमा को
बताते हुए क हा कि इनकी पूजा से सर्वकार्य सिद्ध होते हैं। उन्होंने सांडी
रोड स्थित मंदिर पर भक्तों को मां के मंत्रों के जप एवं नियम संयम से पूजा
आराधना करने के मंत्र बताए। धर्म की राह को सन्मार्ग बताते हुए माता की
आराधना के महत्व को बताया।