हरदोई। जिला अस्पताल की इमरजेंसी की बदहाल सेवाएं मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रहीं हैं।
बृहस्पतिवार को इमरजेंसी से नदारद थे डॉक्टर, थमी सांसें शीर्षक से खबर अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की थी, इसके बाद मेडिकल कालेज की प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता ने दो डॉक्टरों की सेवा समाप्त कर दी, जबकि एक डॉक्टर से जवाब-तलब किया है।
मझिला थाना क्षेत्र के ग्राम पारा कलॉ निवासी बिटिया सिंह (65) सांस रोगी थी। बृहस्पतिवार को सुबह उनकी तबीयत खराब हो गई थी। परिजन उसे जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लाए थे।
जहां ड्यूटी पर कोई डॉक्टर नहीं था, जबकि जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. अशोक प्रियदर्शी और मेडिकल कॉलेज के दो जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी थी।
डॉक्टरों के न होने पर कर्मचारियों ने बिटिया सिंह को केवल ऑक्सीजन लगा दी थी, लेकिन डॉक्टर के न होने के चलते उपचार नहीं मिल सका था। वहीं, सुबह नौ बजे से 11 बजे तक कोई डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं पहुंचा था।
इस बीच बिटिया सिंह ने दम तोड़ दिया था। उनकी मौत के बाद कर्मचारी आधे घंटे ऑक्सीजन लगाकर जिंदा बताते रहे थे। उक्त खबर के छपने के बाद मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य ने दो जूनियर डाक्टर सुरभि धर और डॉ. अभिनव रत्न लोधी की सेवा समाप्त कर दी।
इसके साथ ही सर्जन डॉ. अशोक प्रियदर्शी को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। तीन दिन में सीएमएस को स्पष्टीकरण देना है।