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वैज्ञानिक सूझबूझ वाले थे विनायक नरहरि

Fri, 11 Sep 2015 11:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
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महाराष्ट्र के कोंकण में जन्मे नरहरि भावे जो आगे चलकर विनोबा भावे के नाम से जाने गए, उन्होंने अपने पूरे जीवन काल में ऐसा कुछ कर दिया जो पूरा देश आजीवन उनका ऋणी रहेगा। भूदान आंदोलन को लेकर उनके संघर्ष को आज भी लोग याद रखते हैं।
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गांधी भवन में समाजसेवी व स्वतंत्रता सेनानी विनोबा भावे की जयंती मनाई गई। सभी ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। जयंती समारोह को संबोधित करते हुए सर्वोदय आश्रम की उर्मिला श्रीवास्तव ने गांधी जी के साथ विनोबा भावे की प्रथम मुलाकात पर उनके द्वारा कही पंक्तियों को दोहराते हुए कहा कि जिन दिनों में काशी में था, मेरी पहली अभिलाषा हिमालय की कंदराओं में जाकर तप साधना करने की थी।

दूसरी अभिलाषा थी बंगाल के क्र ांतिकारियों से भेंट करने की, लेकिन इनमें से एक भी अभिलाषा पूरी न हो सकी। समय मुझे गांधी जी के पास ले गया। वहां जाकर मैंने पाया कि उनके व्यक्तित्व में हिमालय जैसी शांति है तो बंगाल की क्रांति की धधक भी। मैंने छूटते ही स्वयं से कहा था कि मेरी दोनों इच्छाएं पूरी हुई।
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उर्मिला श्रीवास्तव ने उनकी कही पंक्तियों को विराम देते हुए कहा कि गांधी जी व विनोबा भावे की मुलाकात क्र ांतिकारी थी। कहा कि भारत को विकास के मार्ग पर ले जाने के लिए हम सभी को उनके जीवन परिचय और लक्ष्य की खातिर लिए गए निर्णयों से प्रेरणा लेनी चाहिए। इस मौके पर अशोक उपाध्याय, प्रीतेश दीक्षित अमित त्रिवेदी, एससी श्रीवास्तव, आरके पांडे आदि मौजूद थे।
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