हरदोई। लोकसभा चुनाव से पहले संगठन के कील कांटे दुरुस्त करने की कवायद में लगी भाजपा ने जिलाध्यक्ष बदल दिया है। जिलाध्यक्ष रहे श्रीकृष्ण शास्त्री को कार्यकाल पूर्ण करने से पहले ही हटाकर युवा कार्यकर्ता सौरभ मिश्रा को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। गुरुवार देर रात इसकी घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर लोग उनको बधाई देने लगे।
वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले वर्ष 2016 में भारतीय जनता पार्टी ने कौढ़ा निवासी श्रीकृष्ण शास्त्री को जिलाध्यक्ष बनाया था। शास्त्री के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव में भाजपा को आठ में से सात विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई, लेकिन विधानसभा चुनाव के कुछ माह बाद हुए निकाय चुनाव में जनपद में भाजपा प्रत्याशियों की हालत दयनीय हो गई। 13 नगर निकायों में से सिर्फ बेनीगंज नगर पंचायत मेें भाजपा अध्यक्ष पद पर जीत सकी। इसके बाद से ही जनपद में नेतृत्व परितर्वन की सुगबुगाहट होने लगी थी। पिछले एक माह से जिलाध्यक्ष बदले जाने की चर्चाएं तेज थीं, जो गुरुवार रात जिलाध्यक्ष बदलने के साथ ही थम गईं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय की ओर से जारी की गई सूची में श्रीकृष्ण शास्त्री की जगह सौरभ मिश्रा को भाजपा का नया जिलाध्यक्ष बनाया गया है। शुक्रवार को दिन भर सौरभ के अध्यक्ष बनने की खुशी में अलग अलग स्थानों पर आयोजन होते रहे। कहीं मिठाई बांटी गई तो कहीं पटाखे छुड़ाकर खुशी मनाई गई।
2004 में संघ से जुड़े थे सौरभ
शाहाबाद विकास खंड के ग्राम गुजीदेई निवासी सौरभ मिश्रा 37 वर्ष के हैं। वर्ष 2004 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। इसके बाद प्रथम और द्वितीय वर्ष का प्रशिक्षण भी आरएसएस से लिया। 2007 में वह भाजपा से जुड़ गए। तत्कालीन जिलाध्यक्ष राम बहादुर सिंह ने उन्हें जिला कार्य समिति का सदस्य बनाया। वर्ष 2009 में तत्कालीन जिलाध्यक्ष राजीव रंजन मिश्रा ने सौरभ को शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र का सदस्यता अभियान प्रमुख बनाया और बाद में जिला मंत्री पद की जिम्मेदारी दी। इसके बाद सौरभ को अवध क्षेत्र के झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के संयोजक का दायित्व मिला। बीते दिनों उन्हें अवध क्षेत्र का युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाने की पेशकश की गई थी, लेकिन सौरभ ने इनकार कर दिया था।
राठौर का आशीर्वाद बन गया सौरभ के लिए संजीवनी
जिलाध्यक्ष बदलने की चर्चाओं के बीच अखिलेश पाठक, अभय शंकर शुक्ला और अशोक सिंह ने भी मजबूती से दावा किया था। इन तीनों को पीछे छोड़ सौरभ मिश्रा जिलाध्यक्ष बन गए। इसके पीछे प्रदेश उपाध्यक्ष और अवध क्षेत्र के प्रभारी जेपीएस राठौर की भूमिका बेहद अहम रही। महामंत्री संगठन सुनील बंसल के करीबी माने जाने वाले राठौर से जब गोपनीय रिपोर्ट मांगी गई तो अन्य दावेदारों की अपेक्षा में सौरभ सबसे आगे रहे। इसी रिपोर्ट पर मुहर लगी और सौरभ जिलाध्यक्ष बन गए।
उपलब्धियों और विवादों के बीच घिरे रहे शास्त्री
गुरुवार आधी रात के बाद से निवर्तमान जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण शास्त्री के कार्यकाल में उपलब्धियों की कमी नहीं है, लेकिन कड़वा सच यह भी है कि उनके खाते में विवादों की भरमार है। उनके नेतृत्व में विधानसभा की आठ में से सात सीटों पर सफलता मिली। छह ब्लाक प्रमुखों के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाकर पद से हटाया गया और उन पर भाजपा समर्थकों को पदासीन कराया गया। यह बात और है कि शास्त्री पर भाजपा कार्यकर्ताओं नहीं बल्कि जेबी कार्यकर्ताओं को पदों पर बैठाने का आरोप लगा। क्रय विक्रय समिति के अध्यक्ष पद से लेकर अन्य विभिन्न पदों पर भी जेबी लोगों को एडजेस्ट करने का आरोप शास्त्री पर रहा, लेकिन वह इन आरोपों को नकारते रहे। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष विद्याराम वर्मा ने तो उनके साथ-साथ कई तत्कालीन क्षेत्रीय पदाधिकारियों की शिकायत भी संगठन के उच्च पदाधिकारियों से की थी।
संतुलन बनाकर चलना होगी सौरभ की बड़ी चुनौती
गुटों में बंटी भाजपा को साधना सौरभ मिश्रा के लिए बड़ी चुनौती होगी। पुराने और कैडर के कार्यकर्ताओं के साथ ही विधानसभा चुनाव के दौरान या उसके बाद सत्ता के साथ भाजपा में आए लोगों के बीच संतुलन साधना भी सौरभ के लिए कांटों भरी डगर जैसा होगा। हालांकि संघ पृष्ठभूमि से होने के कारण सौरभ पुराने और कैडर के कार्यकर्ताओं को तवज्जो देकर चलेंगे। शास्त्री के कार्यकाल में उपेक्षित रहे अधिकतर वरिष्ठ नेताओं का साथ सौरभ को मजबूती से मिलेगा।