नागरिकता संशोधन कानून सहित 12 मांगों को लेकर कलक्ट्रेट में धरना देने जा रहे सपाइयों को पुलिस ने सपा कार्यालय परिसर से बाहर ही नहीं निकलने दिया।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सपाइयों ने कार्यालय से निकलने के लिए भरसक प्रयास किए, लेकिन पुलिस ने सभी कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। छह महिलाओं सहित 143 सपा नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लेकर पुलिस लाइन में बैठा दिया। देर शाम इन सभी को रिहा कर दिया गया।
समाजवादी पार्टी ने नागरिकता संशोधन कानून, किसानों की समस्याओं और कानून व्यवस्था के मामले पर सभी जनपदों में कलक्ट्रेट परिसर में धरना देकर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था।
इसके मद्देनजर गुरुवार की सुबह से ही सपा जिलाध्यक्ष जितेंद्र वर्मा जीतू के नेतृत्व में पार्टी नेता नगर पालिका परिसर स्थित सपा के जिला कार्यालय में एकत्र होने लगे थे। सपा के विरोध प्रदर्शन से निपटने के लिए कई थानों का पुलिस बल और पीएसी नगर पालिका परिसर में तैनात कर दिया गया था।
सपाई जैसे ही कार्यालय से निकल कर कलक्ट्रेट की तरफ बढ़े, वैसे ही सीओ सिटी विजय कुमार राणा, नगर मजिस्ट्रेट गजेंद्र कुमार व अभिसूचना इकाई के प्रभारी निरीक्षक श्रीश शर्मा ने सपाइयों को धारा-144 लागू होने और धरना प्रदर्शन की अनुमति न होने का हवाला देते हुए कलक्ट्रेट न जाने को कहा।
इस पर सपाई आक्रोशित हो गए और रोडवेज बस अड्डे के पास स्थित नगर पालिका परिसर के गेट पर सड़क पर बैठ कर ही नारेबाजी करने लगे।
पुलिस ने इन लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन न मानने पर सीओ सिटी ने सभी को हिरासत में ले लेने की चेतावनी दी। इसके बावजूद सपाई नहीं मानें तो सीओ सिटी ने मौके पर मौजूद 143 सपा नेताओं को हिरासत में ले लिया और सभी को बसों से पुलिस लाइन भेज दिया।
जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है उनमें जिलाध्यक्ष के अलावा पूर्व सांसद ऊषा वर्मा, पूर्व विधायक राजेश्वरी, अवध कुमार सिंह बागी, पूर्व जिलाध्यक्ष शराफत अली, पम्मू यादव, जिला उपाध्यक्ष अजय सिंह पाल, जिला महासचिव वीरेंद्र सिंह वीरे, अनिल सिंह वीरू, प्रहलाद मिश्रा, मुकुल सिंह आशा, संजय कश्यप, प्रशांत मिश्रा, गीता सिंह, रत्नेश यादव, सईद अहमद, अजय पांडेय, धर्मवीर सिंह यादव, विजय बाबू वाजपेई, परिवेश श्रीवास्तव, कुलदीप यादव, रेहान खां आदि शामिल रहे।
दुष्कर्म व हत्याओं के दोषियों को घटना के 30 दिन के अंदर दंडित किया जाए
ओलावृष्टि से फसलों के नुकसान की भरपाई की जाए
गन्ना माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए
गन्ना मूल्य बढ़ाकर 450 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए
गन्ना क्रय केंद्रों पर गन्ने की उतराई के लिए जबरन शुल्क न लिया जाए
गन्ना मूल्य का भुगतान खरीद के 15 दिन के अंदर दिया जाए
किसानों का गन्ना मूल्य का पिछला बकाया ब्याज सहित 31 दिसंबर तक दिया जाए
पूर्वांचल की बंद चीनी मिलों को चलवाया जाए
धान क्रय केंद्रों पर बोरे उपलब्ध कराए जाएं
धान क्रय केंद्रों पर बिचौलियों का हस्तक्षेप खत्म किया जाए
पराली जलाने के नाम पर किसानों पर हुई कार्रवाई वापस ली जाए