यज्ञ का तात्पर्य है त्याग, बलिदान एवं शुभकर्म। यज्ञ
के समय उच्चारित वेद मंत्रों की पुनीत शब्द ध्वनि आकाश में व्याप्त होकर
लोगों के अंत:करण को सात्विक एवं शुद्ध बनाती है।
अखिल विश्व गायत्री
परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में गायत्री शक्ति पीठ अशराफ टोला
में चल रहे नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ के तीसरे दिन गुरुवार को यह बात यज्ञ
के स्वरूप का वर्णन करते हुए आचार्य राम तपस्या ने संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि अपने प्रिय खाद्य पदार्थों एवं मूल्यवान सुगंधित पौष्टिक
दृव्यों को अग्नि एवं वायु के माध्यम से समस्त संसार के कल्याण के लिए यज्ञ
द्वारा वितरित किया जाता है। वायु शोधन से सबको आरोग्यवर्धक सांस लेने का
अवसर मिलता है। हवन हुए पदार्थ वायुभूत होकर प्राणिमात्र को प्राप्त होते
हैं।
उन्होंने कहा कि प्रकृति का स्वभाव यज्ञ परंपरा के अनुरूप है। समुद्र
बादलों को उदारता पूर्वक जल देता है और बादल वायु के सहयोग से एक स्थान से
दूसरे स्थान तक ढो कर ले जाते हैं। कहा कि बादल बरसाने का श्रम वहन करते
हैं। भूमि को सींचते हैं, प्राणियों की प्यास बुझाते हैं।
इस प्रकार संसार
में जो कुछ भी स्थिर व्यवस्था है, वह यज्ञवृति पर ही अवलंबित है। ऋषियों
ने कहा कि यज्ञ ही इस संसार चक्र का धुरा है। धुरा टूटने पर गाड़ी का आगे
बढ़ सकना कठिन है। उधर, सायंकाल हुए संगीत प्रवचन में शांतिकुंज से आए गोरा
प्रसाद साहू ने संगीत जीवन है तेरे हवाले ओ गुरुवर मेरे...गीत से उपस्थित
श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
आचार्य अनिल ठाकुर ने कहा कि हमारा मन कब
आनंदित होता है, जब हमारे हृदय में भक्ति प्रवेश कर जाती है। तब हमारा हृदय
आनंदित होता है। भक्ति से हमारा आत्मबल बढ़ता है और आत्मबल बढ़ने से संसार
को पराजित करने की क्षमता मानव में आ जाती है।
उधर, तीसरे दिन भी यज्ञ
के साथ साथ दीक्षा संस्कार, विद्यारंभ संस्कार, अन्नप्रासन, जन्मदिन
संस्कार संपन्न हुए। आचार्य पूजन बसंत गुप्ता ने किया। यज्ञ संचालन हरिहर
वत्स सिंह ने किया।
इस मौके पर सर्वेंद्र अवस्थी, रमेश सिंह, संजय सिंह,
शालिनी शर्मा, निधि श्रीवास्तव, गीता दीक्षित, सुधा दीक्षित, जय भगवान
अग्रवाल, पीसी शुक्ला, निर्मला शुक्ला, प्रेम चंद्र कश्यप, ब्रजपाल सिंह
आदि मौजूद थे।