हरदोई। बदलते मौसम के बीच वायरल संक्रमण के मामले बढ़ने के साथ अब गर्भवती महिलाएं भी चपेट में आ रही हैं। ओपीडी में सर्दी, खांसी, बुखार और गले में खराश जैसे लक्षणों की शिकायत लेकर गर्भवतियां पहुंच रही हैं। इन दिनों स्वाइन फ्लू इंफ्लुएंजा के मामले सामने आ रहे हैं चूंकि गर्भवतियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ फेफडोंं और हृदय की कार्यप्रणाली में बदलाव होता है। डॉक्टरों ने गर्भवती महिलाओं को संक्रमण के प्रति सतर्कता बरतने की सलाह दी।
गर्भवतियों में वायरल संक्रमण फैलने की आशंका अधिक रहती है। इन दिनों ओपीडी में सर्दी जुकाम से पीड़ित महिलाएं अधिक आ रही हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. बुशरा बहार ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में अचानक बुखार, सूखी या लगातार खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ मरीजों में उल्टी, मतली या दस्त की शिकायत भी हो सकती है। खास बात यह है कि हर गर्भवती महिला में बुखार होना जरूरी नहीं। वहीं मां के बीमार होने पर गर्भस्थ शिशु पर भी असर पड़ सकता है। गर्भावस्था में फ्लू के लक्षण दिखने पर उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह से ही एंटीवायरल दवा दी जानी चाहिए। शुरुआती 48 घंटे में उपचार शुरू होने से लाभ अधिक मिलता है।
संक्रमण के यह हैं लक्षण
गंभीर संक्रमण की स्थिति में निमोनिया, सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन की कमी, डिहाइड्रेशन और पहले से मौजूद अस्थमा जैसी बीमारी बढ़ सकती है। गंभीर मामलों में अस्पताल या आईसीयू में भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है।
बचाव के लिए बरतें सावधानी
स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा-ए (एच 1 एन 1) वायरस से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने पर संक्रमण फैल सकता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ. बुशरा ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को डॉक्टरी सलाह से ही इन्फ्लुएंजा वैक्सीन लगवानी चाहिए। संक्रमित व्यक्ति से दूरी रखें, नियमित रूप से हाथ धोएं और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
हर बुखार स्वाइन फ्लू नहीं
डॉ. बुशरा ने बताया कि बुखार और खांसी होने का मतलब यह नहीं कि मरीज को स्वाइन फ्लू हो। सामान्य वायरल संक्रमण में भी इसी तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। इसलिए घबराने के बजाय लक्षणों पर नजर रखें और डॉक्टरी सलाह लें।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
-सांस लेने में कठिनाई या अत्यधिक सांस फूलना।
-सीने में दर्द या दबाव महसूस होना।
-लगातार तेज बुखार।
-बहुत अधिक कमजोरी या चक्कर आना।
-लगातार उल्टी या पानी न पी पाना।
-गर्भस्थ शिशु की हलचल कम होना।
-लक्षणों का तेजी से बिगड़ना।
फोटो- 10- महिला अस्पताल में मरीज को परामर्श देतीं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. बुशरा बहार। संवाद