फोटो-28-मवैया निवासी राजीव दीक्षित के खेत में बारिश के कारण धान की फसल। संवाद
हरदोई। बीते सोमवार से कभी धीमी तो कभी तेज बारिश का सिलसिला चल रहा है। बृहस्पतिवार को तो पूरे दिन बादल बरसते रहे। इस बरसात का असर धान की फसल पर बेहद खराब पड़ा है। खेतों में पकी खड़ी धान की फसल पलट गई है। बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं जिन्होंने धान कटवा लिया, लेकिन अभी खेत से उठा नहीं पाए। ऐसे किसानों के धान भीग गए हैं। अबधान सुखाने के लिए मशक्कत करनी होगी, तो उपज पर भी प्रभाव पड़ेगा।
जनपद में लगभग 1.80 लाख हेक्टयेर क्षेत्रफल में धान की खेती होती है। ज्यादातर खेतों में धान की फसल पक चुकी है। तकरीबन साठ फीसदी फसल की कटाई भी हो गई है। इस सबके बीच सोमवार से बारिश का सिलसिला चल रहा है। बारिश के कारण धान की फसल खराब हो रही है। हवा के साथ पानी बरसने से फसल पलटी है। पलटी हुई फसल में धान का दाना खराब हो जाता है और इसकी कुटाई पर चावल दागदार निकलता है। साथ ही दाना टूटता भी है और बाजार में इस धान को अच्छी कीमत नहीं मिल पाती। इसी तरह खेतों में कटे पड़े धान भी बारिश में भीगकर खराब हुए हैं। किसानों को अब धान बेचने से पहले सुखाना भी पड़ेगा।
17 फीसदी से ज्यादा नमी पर नहीं खरीदा जाता धान
सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद से पहले इसकी नमी की जांच की जाती है। अधिकतम 17 फीसदी तक नमी होने पर धान खरीद लिया जाता है। इससे ज्यादा नमी होने पर धान की खरीद सरकारी क्रय केंद्र पर नहीं होती। ऐसे में किसानों को अपनी उपज मंडी में आढ़तियों के हाथों बेचनी होती है। सरकारी क्रय केंद्रों की अपेक्षा मंडी में आढ़तियों के यहां भाव काफी कम है। ऐसे में अंतत: नुकसान किसानों का ही होता है।