हरदोई। काम में लापरवाही और कुपोषण के खात्मे के लिए प्रयासों में कमी पर मुख्य विकास अधिकारी सान्या छाबड़ा ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने ई-कवच पर बच्चों को रेफर किए जाने की स्थिति शून्य होने पर 17 स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्साधिकारी (एमओआईसी) सहित 35 कर्मचारियों से जवाब तलब किया है। वहीं, पोषाहार और मातृ वंदना योजना की कम स्थिति पर तीन सीडीपीओ को नोटिस दिया है।
सीडीओ ने बृहस्पतिवार को विकास भवन में जिला स्तरीय पोषण समिति की बैठक में समीक्षा की। उन्होंने बाल सेवा और पुष्टाहार विभाग के समन्वय विभागों के माध्यम से कराए जाने वाले कामों की एक-एक कर प्रगति की जानकारी ली। बाल विकास परियोजनावार समीक्षा में शाहाबाद के सीडीपीओ राहुल कुमार गैरहाजिर थे। उनके स्थान पर एक सुपरवाइजर के शामिल होने पर नाराजगी जताई। टीएचआर से पोषाहार का केंद्रों पर उपलब्ध कराने और लाभार्थियों को चेहरा प्रमाणीकरण से वितरण कराने की कम स्थिति पर नोटिस देने के निर्देश दिए। वहीं, भरखनी की प्रभारी सीडीपीओ गीता ने 222 बच्चों को कुपोषित श्रेणी में बताया। मातृ वंदना योजना की स्थिति भी कम मिली। उन्हें भी नोटिस देने के निर्देश दिए।
सीडीओ ने प्रभारी सीडीपीओ को निर्देश दिए कि कुपोषित बच्चों की सूची स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी को प्राप्त कराएं। प्रभारी चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि एएनएम के माध्यम से बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराएं। मातृ वंदना योजना की कम स्थिति और फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की जानकारी न दे पाने पर कछौना की सीडीपीओ प्रमिला जोशी को भी नोटिस देने के निर्देश दिए।
वहीं, कुपोषित बच्चों को एनआरसी पर भर्ती कराने में तेजी लाने के निर्देश दिए। ई-कवच पर जनवरी माह में सुरसा और टोडरपुर को छोड़कर अन्य परियोजनाओं पर रेफर की स्थिति शून्य रही। इस पर सीडीओ ने 17 प्रभारी चिकित्साधिकारियों, एक डीपीसीएम और 17 बीपीसीएम से जवाब तलब किया है। बैठक में प्रभारी डीपीओ रमेंद्र सिंह सहित अधिकारी मौजूद रहे।