यह पाई गई गड़बड़ी
विजिलेंस टीम ने दर्ज कराई गई रिपोर्ट में 8.5 मीटर के 466 पीपीसी पोल, नौ मीटर डबल 36 पीसीसी पोल, एचटी लाइन 227 पीसीसी पोल,एलटी लाइन के पीसीसी पोल, इसके अलावा 446 विद्युत पोल के बीच की 46.6 किमी लाइन, इसके अलावा 227 एलटी लाइन के पोल के बीच 9.08 किमी, 10 केवीए के 36 ट्रांसफार्मर, 16 केवीए के 38 ट्रांसफार्मर कम पाएं गए है। इसके अलावा सेक्सनलाईजर, स्टोन पैड,डेंजर बोर्ड, अर्थिंगवायर, 33 केवीए के न्यू उपकेंद्र में खामियां पाई गई। जिसका पूरा भुगतान कर दिया गया है।
इस दौरान जिले में तैनात रहे अधिकारी
एसडीओ देवेंद्र प्रसाद जोशी मई 2006 से अगस्त 2012 तक, अमजद अली जुलाई 2006 से जून 2010 तक, प्रमोद आनंद नवंबर 1994 से अप्रैल 2010, अवर अभियंता बैजनाथ सिंह जुलाई 1993 से जनवरी 2009, नरेश सिंह एक सितंबर 2007 से दिसंबर 2011 तक तैनात रहे।
यह है आरोप
विजिलेंस की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट में विभागीय अधिकारियों पर आरोप है कि उन लोगा कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों से मिलकर सत्यापन रिपोर्ट में गोलमाल किया और कम सामग्री लगी होने के बावजूद पूरी अधिक सामग्री लगी होने का सत्यापन कर दिया।
वर्तमान में जिले में तैनात अधिकारियों की यहां है स्थिति
विजिलेंस टीम की एफआईआर में जो अधिकारी शामिल हैं, उनमें एसडीओ देवेंद्र प्रसाद जोशी वर्तमान में अधीक्षण अभियंता के पद पर जनपद गोरखपुर में तैनात है। एडीओ अमजद अली, प्रमोद आनंद, जेई बैजनाथ सिंह, नरेश सिंह सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
अभी और भी मिल सकता है गोलमाल
जिले में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत अभी विजिलेंस टीम 85 गांवाें की ही जांच कर पाई है, जबकि जिले में 776 गांवों का योजना के तहत विद्युतीकरण कराया गया था। विजिलेंस टीम ने इस मामले में और भी अधिकारियों के शामिल होने और गबन की धनराशि बढ़ने की संभावना जताई है। विजिलेंस टीम ने जांच जारी रहने का एफआईआर में जिक्र किया है।