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मरीजों को राहत : अब हाथ में मिलेगी एक्सरे फिल्म, डिजिटल मशीन शुरू

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फोटो-11- मेडिकल कॉलेज में डिजिटल मशीन से एक्सरे करते टेक्नीशियन। संवाद
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज में एक्सरे कराने आने वाले मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। बीते पांच महीनों से तकनीकी खराबी के कारण धूल फांक रही डिजिटल एक्सरे मशीन आखिरकार ठीक हो गई। 15 दिनों से ट्रायल पर चल रही मशीन से अब विधिवत सभी जांच शुरू हो गईं। साथ ही मरीजों को एक्सरे की फिल्म भी मिलने लगी है। अभी तक मोबाइल पर इमेज लेनी पड़ती थी अब फिल्म मिलने से सहूलियत है।
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एक्सरे जांच के लिए लगी डिजिटल मशीन काफी पुरानी हो चुकी और रोजाना 150 से 200 मरीजों के करीब 350 से अधिक एक्सरे होते हैं। यही वजह है कि अधिक लोड पड़ने से मशीन आए दिन खराब हो जाती है। पांच माह बाद 12 फरवरी को मशीन को कार्यदायी संस्था सायरिक्स के कर्मचारियों ने दुरुस्त कर दिया और मशीन का ट्रायल हो रहा था।
वैसे भी मशीन खराब होने से अब तक मरीजों को केवल उनके मोबाइल पर एक्सरे की फोटो खींचकर दी जाती थी। इससे सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों और उन मरीजों को हो रही थी जिनके पास स्मार्टफोन नहीं थे। साथ ही मरीज जब रिपोर्ट किसी अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाते थे तो मोबाइल की धुंधली इमेज के कारण सटीक परामर्श मिलना मुश्किल हो जाता था। ट्रायल के परिणाम सही आने पर अब मशीन से सुचारू ढंग से जांचें होने लगी हैं। साथ ही मरीजों को फिल्म भी उपलब्ध कराई जाने लगी है। इससे मरीजों को काफी राहत है।
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सटीक डायग्नोसिस में आ रही थीं दिक्कतें
मोबाइल पर एक्सरे की इमेज दिए जाने से सटीक डायग्नोसिस नहीं हो पाता था। मोबाइल स्क्रीन पर पिक्सेल फटने के कारण बारीक फ्रैक्चर नजर नहीं आते जबकि फिल्म पर चिकित्सक बेहतर जांच कर सकते हैं। इसके अलावा मरीज को रेफर किए जाने के मामले में हायर सेंटरों पर फिजिकल फिल्म की मांग की जाती है जबकि फोटो में कंट्रास्ट और डेप्थ कम होने से गलत डायग्नोसिस का खतरा रहता है। मोबाइल पर इमेज होने की वजह से मरीजों को दोबारा एक्सरे कराना पड़ रहा था।



मशीन पर खर्च हो चुके 22 लाख रुपये
मेडिकल कॉलेज की वर्षों पुरानी डिजिटल एक्सरे मशीन बीते वर्ष 2025 में कई बार खराब हो चुकी है। डिजिटल मशीन जनवरी से सितंबर के बीच पांच बार खराब हुई थी। इसके बाद से मशीन पूरी तरह से ठप हो गई। कभी प्रिंटर कंट्रोल बोर्ड (पीसीबी), कभी सरबो तो कभी पिक्चर ट्यूब में खराबी के कारण मशीन बंद रही। फरवरी में मशीन बनवाई गई और अभी तक इस पर करीब 22 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।


तकनीकी खराबी को दूर कर डिजिटल एक्सरे मशीन की सुविधा बहाल कर दी गई है। अब किसी भी मरीज को मोबाइल इमेज के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। अस्पताल का प्रयास है कि मरीजों को सभी सुविधाएं निर्बाध रूप से मिलें। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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