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पति का मस्तक लेकर सती हुई सुलोचना

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हरदोई। नुमाइश मैदान में चल रही रामलीला में सोमवार को कलाकारों ने मेघनाद की पत्नी सुलोचना के सती होने की लीला का मंचन किया। लीला को देखकर लोगों ने कलाकारों की तारीफ की।
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कथा व्यास विष्णु कुमार दत्तात्रेय ने लीलाओं का सारगर्भित सूक्ष्म वर्णन कर लोगों को लीला में छिपे संदेश से अवगत कराया। संगीतमयी चौपाईयों के बीच शुरू हुई लीला में कलाकारों ने दिखाया कि मेघनाद का यज्ञ विफल होने के बाद लक्ष्मण जी और मेघनाद में घनघोर युद्ध होता है और अंत में मेघनाद मारा जाता है। मेघनाद के सिर को लक्ष्मण काटकर ले आते हैं तथा शव को लंका में फेंक देते हैं।
जहां एक हाथ कटकर सुलोचना के महल में पहुंच जाता है। मेघनाद के हाथ को देख कर सुलोचना विलाप करती हैं और अपनी पतिव्रता शक्ति से भुजा से ही सारा वृतांत जान लेती हैं। श्रृंगार उतारकर वह महारानी मंदोदरी के पास पहुंचती हैं और पति के मस्तक को वापस लाने का अनुरोध करती हैं व रावण से भी वार्ता करती हैं। रावण से उचित उत्तर न मिलने पर वह खुद जाकर श्रीराम से मेघनाद का सिर देने की विनती करती हैं।
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राम के दल में सभी लोग सिर को वापस करने से मना करते हैं लेकिन श्रीराम कहते हैं कि सुलोचना एक पतिव्रता स्त्री है तो उसके पति का सिर उसे अवश्य मिलना चाहिए। श्रीराम के आदेश पर मेघनाद का सिर सुलोचना को दे दिया जाता है। जिसे लेकर वह लंका पहुंचती हैं और सिर के साथ सती हो जाती हैं। कलाकारों ने सुलोचना सती की लीला को काफी सजीव ढंग से प्रस्तुत किया।
जिसे देखकर लोग भाव विभोर हो गए। इस मौके पर आयोजक राम प्रकाश शुक्ला, कृष्ण अवतार दीक्षित वाले आदि मौजूद रहे। इसके साथ ही रविवार देर शाम मेला पंडाल में वृंदावन के कलाकारों ने रासलीला का मंचन किया।
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हरदोई। आयोजक राम प्रकाश शुक्ला ने बताया कि 25 फरवरी को नुमाइश मैदान में रावण वध, रावण राजनीति की लीलाओं का मंचन होगा।
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