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रामगंगा का पुल : चार साल में 29 करोड़ रुपये बढ़ गई पुल की लागत, फिर भी अधूरा

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हरदोई। रामगंगा नदी पर अर्जुनपुर-बड़ा गांव मार्ग पर पुल का निर्माण स्वीकृति के चार साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। इतना जरूर है कि पुल के निर्माण की लागत लगभग 29 करोड़ रुपये बढ़ गई है। कार्यदायी संस्था का दावा है कि जनवरी 2026 तक पुल का निर्माण पूरा हो जाएगा।
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रामगंगा नदी पर पुल के निर्माण की मांग स्वीकृति के चार दशक पहले से हो रही थी। सत्ता और विधायक बदलते रहे लेकिन स्थानीय सियासत और वोट बैंक की राजनीति से इस पुल के निर्माण को मंजूरी नहीं मिल पा रही थी। हर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अर्जुनपुर में रामगंगा नदी पर पुल चुनावी मुद्दा बनता था।



क्षेत्रीय विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (तब लोक निर्माण विभाग के मंत्री भी थे) से पैरवी कर पुल को मंजूरी दिलाई थी। 15 सितंबर 2021 को पुल निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ था। तब इस पुल पर 106 करोड़ 78 लाख 71 हजार रुपये खर्च होने थे। इसी बजट को मंजूरी मिली थी। निर्माण कार्याें के दौरान वर्ष 2023 में आई बाढ़ के कारण निर्माणाधीन पुल का संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था। इस कारण काम रोक दिया गया।
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क्षतिग्रस्त होने की वजह तलाशने और स्थायी समाधान निकालने के लिए बनारस आईआईटी के विशेषज्ञों की टीम ने यहां कई बार आकर जायजा लिया। इसके बाद कुछ सुझाव दिए। इन सुझावों का पालन कराने के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता हुई। ऐसे में पुल की लागत 29 करोड़ 80 लाख रुपये बढ़ गई। बावजूद इसके अभी तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है।







... तो आगणन और प्रस्ताव बनाते समय हुई थी हीलाहवाली



. बीएचयू आईआईटी की टीम ने कई बार मौके का निरीक्षण किया। इसके बाद पाया कि सेतु का पहुंच मार्ग अर्जुनपुर की तरफ से क्षतिग्रस्त हो गया है। विकल्प के रूप में अर्जुनपुर की तरफ से 350 मीटर लंबाई बढ़ाए जाने का सुझाव दिया गया। इसी सुझाव को मान लिया गया। अध्ययन में यह भी पता चला कि पुल से लगभग सात किलोमीटर दूर अपस्ट्रीम में गंगा नदी बहती है। बाढ़ के दौरान इसमें बैक फ्लो हुआ और इसकी वजह से रामगंगा नदी भी उफनाई जिसने निर्माणाधीन पहुंच मार्ग क्षतिग्रस्त कर दिया। अब सवाल यह उठता है कि जब परियोजना का आगणन और प्रस्ताव बनाया जा रहा था तो इस पर जिम्मेदारों और कार्यदायी संस्था का ध्यान क्यों नहीं गया। इस लापरवाही की वजह से पुल के निर्माण की लागत बढ़ी और जो काम दो साल में पूरा होना था वह चार साल में भी अधूरा है।




कई जनपदों से सीधे जुड़ जाएंगे कटरी के बाशिंदे



अर्जुनपुर-खड़गपुर-बड़ागांव मार्ग पर रामगंगा नदी पर पुल न होने के कारण अभी क्षेत्रीय जनता को हरदोई मुख्यालय हुल्लापुर-रूपापुर घूमते हुए जाना पड़ता है। इससे लगभग 38 किलोमीटर लंबाई बढ़ जाती है। पुल का निर्माण होने से क्षेत्रीय लोग सवायजपुर, हरदोई, कन्नौज, फर्रुखाबाद और बदायूं से सीधे जुड़ जाएंगे।




पुल न होने के कारण हुआ था दर्दनाक हादसा, 90 श्रद्धालुओं की हुई थी मौत



1975 में कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्रद्धालुओं से भरी नाव रामगंगा नदी में पलट गई थी। बुजुर्ग बताते हैं कि इस घटना में लगभग 90 श्रद्धालुओं की डूबकर मौत हो गई थी। घटना में जान गंवाने वाले लोगों में बच्चे, बूढ़े और महिलाएं शामिल थीं। वर्ष 1980 में बिलग्राम के तत्कालीन विधायक हरिशंकर तिवारी के प्रयासों से पैंटून पुल बन गया था लेकिन स्थानीय लोग स्थायी पुल की मांग कर रहे थे।





कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों ने जनवरी में काम पूरा कर लेने का भरोसा दिलाया। फिलहाल प्राथमिकता यही है कि काम समय से पूरा हो जाए। इससे स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी। -अनुनय झा, डीएम
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