गोस्वामी तुलसीदास की जयंती शनिवार को धूमधाम से मनाई
गई। आर्य कन्या महाविद्यालय में जहां छात्राओं द्वारा कार्यक्रम आयोजित
किया गया, वहीं अनुभूति संस्था के द्वारा विचार गोष्ठी आयोजित कर उनसे
प्रेरणा लेने की बात कही गई।
आर्य कन्या महाविद्यालय में हिंदी विभाग
के तत्वावधान में हिंदी परिषद द्वारा तुलसी जयंती हर्षोल्लास पूर्वक मनाई
गई। प्राचार्या निर्मला यादव ने गोस्वामी तुलसीदास के चित्र पर माल्यार्पण
कर कार्यक्रम की शुरुआत की। छात्राओं ने रामचरित मानस से अंत्याक्षरी
कार्यक्रम पेश किया, जिसमें बीए प्रथम की ज्योति सिंह, अंकिता शुक्ला,
जान्हवी व बीए तृतीय वर्ष की ज्योति शुक्ला, संगीता गुप्ता, अंजलि शुक्ला,
अनामिका सिंह व अंजना पटेल ने प्रतिभाग किया।
उसके बाद सामूहिक मानस पाठ की
प्रस्तुति ने मन मोह लिया। कार्यक्रम में डा. आशा मिश्र व डा. मीरा रानी
रावत, डा. स्मिता जायसवाल, डा. रानी भटनागर, सरिता यादव, शोभा सिंह, साधना
शुक्ला आदि मौजूद रहीं। उधर, अनुभूति संस्था द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी
में उपाध्यक्ष भजन लाल गुप्त ने कहा कि संत तुलसीदास ने रामचरित मानस रचकर
जनमानस को सरल भाषा में वेद दर्शन, पुराण और उपनिषद के सिद्धांतों का
ज्ञान करा दिया।
डा. ईश्वर चंद्र ने रामचरित मानस में सामाजिक मूल्यों की
आधुनिक समाज में उपादेयता विषय पर बोलते हुए कहा कि आधुनिक समाज में आई
विकृतियों का एक मात्र निराकरण रामचरित मानस में स्थापित सामाजिक मूल्यों
के अनुकरण से संभव है। महामंत्री सुशील सुशील वर्मा ने कहा कि रामचरित मानस
में राज्य प्रबंधन जिसमें सैन्य, पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, विदेश
नीति, राजदूत के गुण एवं लोकतंत्र का सर्वोत्कृष्ट ज्ञान दिया गया है।
कहा
कि रामभक्ति परंपरा में रामचरित मानस का स्थान सर्वोपरि है। कवि रामरूप
त्रिवेदी ने रामचरित मानस को ज्ञान, भक्ति, वैराग्य की त्रिवेणी बताया।
आयोजक डा. ईश्वर चंद्र ने गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर प्रकाश डाला। वेद
प्रकाश अवस्थी, निशानाथ अवस्थी, राजेंद्र कुमार सिंह आदि मौजूद थे।