फाइलेरिया की दवा खाने के बाद घटी घटना से ग्रामीणों
में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ खासा रोष है। कहना है कि पहले एएनएम ने
गोलियां बांटी अब चिकित्सक दवा बांटकर चले गऐ। बीमारों को अस्पताल तक ले
जाने के लिए भी कोई साधन उपलब्ध नहीं कराया गया।
उनका कहना है कि घटना
की सूचना देने के बाद भी सीएमओ ने मौके पर आना मुनासिब नहीं समझा। मजरा
सोनहार के गांव महुवापुरवा में बीते दिनों फाइलेरिया की दवा वितरित की गई
थी। दवा की गोलियां खाने के बाद ग्रामीणों की हालत बिगड़ी जिसमें 18 वर्षीय
मुन्नी की मौत भी हो गई।
मां फूलमती का कहना था कि उसकी बेटी ने बुधवार को
गोलियां खाई थी और इसके बाद उसकी हालत बिगड़ी, पर समय पर एंबुलेंस भी
उपलब्ध नहीं हो पाई, जिससे अस्पताल भी वह न पहुंच सकी। परिजनों ने बताया कि
मुन्नी के चार भाई व दो बहनें थी। अन्य ग्रामीणों को भी एंबुलेंस सुविधा
नहीं मिली।
ऐसे में जो अपने संसाधनों से सीएचसी पहुंच सके वह वहां जाकर
भर्ती हो गए, जबकि मूकबधिर दीप कुमारी चारपाई पर लेटी आंसू बहा रही है।
उसके भाई राधेश्याम का कहना है कि कोई साधन न मिलने से उसे उपचार के लिए
नहीं ले जा पाए।
इधर, सोहार की आंगनबाड़ी कार्यकत्री देशरानी से जब
ग्रामीणों ने जब दवा के बाबत पूछा तो उसने कहा कि एएनएम के कहने पर वह दवा
बांटने गई थी। उसे क्या मालूम था कि दवा खाने से लोग बीमार हो जाएंगे। उधर,
सीएमओ डा. वीके गुप्ता का कहना है कि फाइलेरिया की दवा खाने से किसी की
हालत नहीं बिगड़ सकती।
पर गांव में जो दवा बांटी गई हैं वह केवल खुली
गोलियों के रूप में दी गई। यदि सीएमओ का दावा सही है तो क्या दवा एक्सपायरी
थी। इस बाबत कुछ चिकित्सकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि
फाइलेरिया की दवा अमूनन नुकसान नहीं करती यदि दवा एक्सपायरी हुई तो उससे
नुकसान हो सकता।
इस बाबत सीएचसी के चिकि त्सक भी कुछ बताने से कतरा रहे
हैं। उनका दावा है कि गोलियां ठीक थी, तबियत क्यों बिगड़ी इसकी जांच के बाद
स्थिति सामने आएगी, पर अभी तक किसी बीमार की जांच कराना भी स्वास्थ्य
विभाग ने मुनासिब न समझा।
ज्ञात हो कि करीब 5 साल पहले टोडरपुर ब्लाक के इस
तरह की घटना घटी थी, जिसमें एएनएम के खिलाफ रिपोर्ट भी हुई, पर बाद में
मामला जहर का निकलने पर उसे रफा दफा कर दिया गया।