हरदोई। मेडिकल कॉलेज में उपचार की व्यवस्था सुधारने के दावों ने मरीज और तीमारदारों को बेहाल करके रख दिया है। आभा आईडी की अनिवार्यता के बाद भी मरीजों को घंटों लाइन में लगने के बाद उपचार मिल पा रहा है। कई बार तो देर से आए मरीजों को ओपीडी में दिखाने का मौका ही नहीं मिल पाता है और समय पूरा होने के बाद डॉक्टर चले जाते हैं। ऐसे में दूर-दराज से आए मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ता है।
उपचार की व्यवस्था हाईटेक बनाने और मरीजों की जानकारी सुरक्षित रखने के कारण अब पंजीकरण काउंटर पर पर्चा बनवाने के लिए आभा आईडी का होना अनिवार्य है। जिनकी आभा आईडी बनी होती है उनके पर्चे तो जल्दी बन जाते हैं लेकिन जिन मरीजों की आभा आईडी नहीं होती है। उनका पर्चा बनाने से पहले आभा आईडी बनाई जा रही है। इसमें मरीज का आधार कार्ड और उनका पूरा ब्योरा डालना पड़ रहा है।
इस वजह से एक पर्चा बनने में सात से 10 मिनट लगते हैं। अगर कहीं सर्वर डाउन हो जाता है तो समय और बढ़ जाता है। मंगलवार को ही दोपहर तक 1963 पर्चे बनाए गए। ऐसे में दूर-दराज के गांवों से आए ग्रामीण घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करते रहते हैं। एक ओर पहले कुछ ही समय में काम हो जाता था, वहीं अब लग रहे अधिक समय के कारण मरीजों का सारा समय पर्चा बनवाने में ही लग जाता है और ओपीडी का समय समाप्त हो जाता है। इस कारण इलाज से पहले ही मरीजों की हिम्मत जवाब दे रही है।
डॉक्टर के उठने तक नहीं आता नंबर
पर्चा बनवाने की इस जंग में सबसे ज्यादा नुकसान उन मरीजों को हो रहा है जो सुबह देरी से अस्पताल पहुंचते हैं। कई बार तीमारदार दो से तीन घंटे तक लाइन में खड़े रहते हैं और जब तक पर्चा हाथ में आता है तब तक ओपीडी का समय समाप्त हो चुका होता है। ऐसे में डॉक्टर अपनी सीट से उठ चुके होते हैं और मरीज को बिना इलाज कराए ही मायूस होकर घर लौटना पड़ता है।
नई व्यवस्था से तीमारदार भी परेशान
मेडिकल कॉलेज परिसर में खड़े तीमारदार मुकेश, छोटे, लज्जाराम का कहना है कि व्यवस्था सुधारने के नाम पर परेशान किया जा रहा है। एक तीमारदार ने कहा कि वह सुबह नौ बजे से लाइन में लगे हैं 11 बज चुके हैं लेकिन अभी भी पर्चा नहीं बना। समझ नहीं आ रहा कि डॉक्टर को कब दिखाएंगे और दवा कब मिलेगी।
शुरुआत में थोड़ा समय लग रहा है इस वजह से स्थिति बदहाल है लेकिन आने वाले दिनों में व्यवस्था सुचारू हो जाएगी। इसके बाद मरीजों को सिर्फ आभा आईडी बताकर या फिर पुराना पर्चा दिखाकर नया पर्चा बन जाएगा। -डॉ. चंद्र कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक