हरदोई। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में ऑनलाइन हुए आवेदनों में सामान्य व पिछड़ा वर्ग के आवेदकाें को चयन से पहले ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। केंद्र सरकार की नई गाइड लाइन में अब अनुसूचित जाति व जनजाति को ही लाभ दिए जाने के निर्देश हैं। नए नियमों के आने से ऑनलाइन आवेदन कर चुके आवेदक ही नहीं बल्कि संबंधित खादी ग्रामोद्योग व उद्योग केंद्र के अधिकारी भी सकते में हैं।
भारत सरकार की प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना के माध्यम से स्वरोजगार स्थापित करने वाले शिक्षित बेरोजगारों को बैंकाें के माध्यम से 25 लाख तक की उत्पादन आधारित परियोजनाएं एवं 10 लाख तक की सेवा आधारित परियोजनाएं लगा सकने का लाभ प्रदान किया जाता है। इसको लेकर समिति के अधिकारी साक्षात्कार लेते हैं और उसके बाद बैंकाें के माध्यम से चयनित फाइलों पर बैंक नियमानुसार ऋण जारी करते हैं।
खादी ग्रामोद्योग एवं जिला उद्योग व उद्यम प्रोत्साहन केंद्र भी इन योजनाओं का संचालन करते हैं। नई गाइड लाइन में अब सिर्फ अनुसूचित जाति व अनुसूचित जन जाति को ही लाभ दिया जाएगा।
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी कमलेश कुमार ने बताया कि निश्चित तौर पर पिछले आवेदनों में से सामान्य व ओबीसी वाले रिजेक्ट कर दिए जाएंगे और एससी व एसटी वाले ही स्वीकार किए जाएंगे। इस बार फिर से 31 जुलाई तक आवेदन मांगे गए हैं।
खादी ग्रामोद्योग से 68 बेरोजगार होंगे निराश
10 जुलाई तक खादी ग्रामोद्योग में लिए गए आवेदनों में 76 आवेदन पत्र आए हैं जिनमें से अनुसूचित जाति के सिर्फ आठ आवेदन हैं। जबकि सामान्य व पिछड़ा वर्ग के 76 आवेदन हैं। गाइड लाइन बदलने के बाद इन 76 बेरोजगारों को निराशा हाथ लगेगी।
उद्योग केंद्र भी तोड़ेंगे 100 से अधिक सपने
उपायुक्त उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र सर्वेश्वर शुक्ला का कहना है कि उन्हें खुद ताज्जुब है। पर सरकार की नई गाइड लाइन आई है जिसमें अनुसूचित जाति व जनजाति को ही लाभ दिया जाना है। उनके विभाग में मांगे गए आवेदनों में 100 से ऊपर आवेदन आने की सूचना है। यहां पर सामान्य व ओबीसी की संख्या अधिक होगी। उनके निश्चित रूप से सपने पूरे होने से पहले ही चकनाचूर होंगे। अनुसूचित जाति व जनजाति को लेकर आवेदन जल्द मांगे जाएंगे।