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Hardoi News: किसान से रसोईघर तक पहुंचने में सब्जियों के 10 प्रतिशत बढ़ जाते भाव

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हरदोई। किसान से रसोईघर तक पहुंचने में सब्जियों के भाव 10 से 12 प्रतिशत बढ़ जाते हैं।
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किसानों की ओर से मंडी में आढ़तियों के फड़ पर सब्जियों की थोक कीमत तय होती है। थोक कीमत के आधार पर ही फुटकर में दुकानदार बाजार और मोहल्लों में ठेला, रेहड़ी से सब्जी की बिक्री करते हैं। हरी सब्जियों के सुर्ख होने से आलू भी भाव दिखा रहा है।

जेठ माह की गर्मियों में किसान पसीना बहाने के साथ ही सब्जी की फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। खेत से रसोईघर तक का सफर तय करने में सब्जियाें के भाव 10-12 प्रतिशत चढ़ जाते हैं। इससे किसानों के पास सब्जी के निकलते ही आढ़तियों और फुटकर विक्रेताओं को मुनाफा हो रहा है और उपभोक्ता को ऊंची कीमत अदा करनी पड़ रही है। हरी सब्जियों के सुर्ख होते ही आम और खास की रसोईघर में अपना स्थान रखने वाले आलू ने भी भाव दिखाए हैं। मंडी में आलू का थोक भाव 2,200 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि बाजार में फुटकर में 150 रुपये के पांच किग्रा. के भाव से बिक रहे हैं।
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हरी सब्जियों में भिंडी में किसान के पास से 200 रुपये की पांच किग्रा. मिलती है और बाजार में इसका भाव 45 रुपये प्रति किग्रा. हो जाता है। टमाटर फुटकर में 30 रुपये, गोभी 80-100 रुपये, तरोई 20 से 30 रुपये, शिमला मिर्च 70 रुपये, घुइयां 50-60 रुपये प्रति किग्रा. के भाव से बिक रही है।
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थोक विक्रेता खालिद ने बताया कि सांडी, बावन और बिलग्राम के किसान अपनी उपज मंडी में लाकर स्वयं थोक भाव में बेच रहे हैं। इससे थोक की कीमतों को बहुत कुछ निर्धारण किसान ही आपस में तय कर लेते हैं। आढ़त का शुल्क लगता है। फुटकर विक्रेता रामू, विजय, राहुल ने बताया कि थोक में खरीद सब्जी को फुटकर में बेचने से वजन में अंतर आता है और फिर दिहाड़ी भी तो इसी से निकालनी है।
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