फोटो-03- मेडिकल स्टोर की दुकान पर लगी दवाइयां। संवाद
हरदोई। बाजार में रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी दवाओं के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ जाने से मरीज व तीमारदारों की जेब पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। लंबे समय तक इलाज कराने वाले मरीजों को पहले से अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
मेडिकल स्टोर संचालकों के अनुसार, बीते कुछ समय में कच्चे माल की कीमत, परिवहन खर्च और कंपनियों की लागत में इजाफा होने से दवाओं के दाम करीब 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़े हैं। जेनरिक कंपनियों के साथ ही ब्रांडेड दवा भी महंगी हुई है इसका असर आम आदमी पर पड़ रहा है। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, एंटीबायोटिक दर्द निवारक, गैस, सर्दी-जुकाम और बुखार की दवाओं के दाम बढ़े हैं। पहले जो दवा 100 रुपये में मिलती थी उसकी कीमत अब 115 से 120 रुपये तक पहुंच गई है। हालांकि, सरकार की ओर से नियंत्रित जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
चिकित्सक डॉ. संदीप कुमार का कहना है कि नियमित दवा लेने वाले मरीजों के लिए यह बढ़ोतरी परेशानी का कारण बन सकती है। शुगर, बीपी और अन्य पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को हर महीने अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। मौसम में बदलाव के चलते वायरल, जुकाम और बुखार के मरीज बढ़ने से दवाओं की बिक्री में भी इजाफा हुआ है। शहर के आलू थोक निवासी अजय द्विवेदी कहना है कि पहले ही इलाज, जांच और अस्पताल आने-जाने में काफी खर्च होता है। ऐसे में दवाओं की कीमत बढ़ने से घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।