मोदी सरकार के रेल मंत्री सुरेश प्रभु के पहले रेल
बजट ने ही लोगों को निराशा के अलावा और कुछ भी नहीं दिया। किसी नई ट्रेन की
घोषणा तो हुई, नहीं उल्टे आरक्षण कराने की मियाद बढ़ा लोगों को झटका ही
दिया। लोग डीजल के दाम घटने से किराए में कमी की उम्मीद लगाए बैठे थे, उस
पर भी रेल बजट में निराशा ही मिली है।
उल्टे ढुलाई व्यय बढ़ जाने से महंगाई
में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल मोदी सरकार के पहले रेल
बजट में लोगाें को निराशा ही हाथ लगी है। उम्मीदों का रेल बजट एक बार फिर
से जिले वासियों के लिए नाउम्मीद साबित हुआ है।
रेल बजट में किसी नई ट्रेन
की घोषणा न होने से यात्रियों को प्रत्यक्ष रूप से कोई लाभ नहीं हुआ है।
वहीं जिले के लोगाें की उम्मीदों पर भी रेल बजट खरा नहीं उतर पाया है। किसी
खास सुविधा की उम्मीद में जिलेवासियों ने जब रेल बजट सुना तो उन्हें
निराशा हुई।
अबकी भी रेल बजट में जिला अछूता रह गया है और जिले से होकर
निकलने वाली रनथ्रू ट्रेन का स्टापेज घोषित नहीं किया गया। इतना ही नहीं
मल्लावां सांसद ने संडीला में कुछ ट्रेन रुकवाने का आश्वासन भी दिया था, पर
अबकी भी उस पर कोई विचार नहीं हुआ।
हालांकि, सबसे अधिक झटका तो यह
सुनकर लगा कि जब रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने आरक्षण कराने की मियाद को बढ़ा
दिया। ज्ञात हो कि अभी तक रेल आरक्षण 60 दिन पहले हो जाता था, पर अब 120
दिन पहले से आरक्षण कराना होगा। ऐसे में लोगों को असुविधा बढ़ी है, जबकि
दलालों की पौ बारह हो जाएगी।
वहीं अनाज पर ढुलाई व्यय बढ़ाकर महंगाई की आग
में घी डालने का काम किया गया, जिससे लोगों को काफी निराशा हुई है। उधर,
रेल बजट से संडीला रेलवे स्टेशन अछूता रहा। रेल बजट में यहां के लिये कुछ
भी नहीं किया गया, जिससे यहां के लोगों में निराशा है।
यहां पर पूछताछ
केंद्र, बुकिंग, आरक्षण के अलग-अलग काउंटर बनाने की मांग वर्षों से होती
चली आ रही है। बिजली न आने के समय पर बड़े जनरेटर लगाने की मांग भी
वर्षों से चली आ रही, पर ध्यान नहीं दिया गया। स्टेशन से आगे जाने को उत्तर
व दक्षिणी मार्ग पर स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग भी होती रही, पर प्रकाश की
व्यवस्था नहीं हो सकी।