संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। हरदोई-लखनऊ मार्ग अब नेशनल हाईवे अथार्टी ऑफ इंडिया के आधीन है। शहर से बाईपास निर्माण की सीमा तक के आठ किमी. के सफर को तय करने में वाहन चालकों को पसीना आ जाता है। लखनऊ चुंगी से ही मार्ग में गड्ढे शुरू हो जाते हैं और यह सफर के साथ नानकगंज ग्रंट तक अपने दायरे व गहराई को बढ़ाते जाते हैं। मन्नापुरवा में तो सड़क पूरी तरह से जर्जर हो गई है और वाहन चालकों को गड्ढों से ही होकर गुजरना पड़ता है। इससे राहगीरों का दर्द बढ़ रहा है और वाहनों को भी क्षति पहुंच रही है।
लखनऊ मार्ग के हालात इन दिनों बेहद खराब हैं, हरदोई की सीमा में आने वाले करीब 55.4 किमी. मार्ग को नेशनल हाईवे अथार्टी ऑफ इंडिया की ओर से फोर लेन बनवाया जा रहा है। इसमें हरदोई शहर की ओर से आठ किमी. पर बाईपास का निर्माण स्वीकृत है और भूमि भी अधिग्रहीत हो चुकी है। इस आठ किमी. के भाग में सड़क कई स्थानों पर जर्जर हो चुकी है। इधर तीन दिन हुई बारिश से मार्ग के गड्ढों से और पत्थर व बजरी बाहर निकल आई है। ऐसे में राहगीरों को हादसों की आशंका रहती है।
लखनऊ रोड पर शहर की ओर से चलने पर लखनऊ चुंगी पर पहुंचते ही मार्ग के गड्ढे वाहन चालकों को दर्द के साथ तनाव भी देना शुरू कर देते हैं। चांद बेहटा में मार्ग में गड्ढे हैं पर, कुछ कम होने से वाहन स्पीड में आ जाते हैं। आगे बढ़ते ही मन्नापुरवा से नानकगंज ग्रंट तक वाहन की स्पीड तो थम ही जाती है, साथ ही चालक यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि वाहन को गड्ढों से बचाकर निकाला कैसे जाए और यही सोचते-सोचते चालक गड्ढों में हिचकोले खाते हुए वाहन को गंतव्य की ओर बढ़ाकर निकल जाते हैं।
शहर में वाहनों के दबाव को कम करने के लिए बनेगा बाईपास
एनएच-731 लखनऊ मार्ग पर शहर से करीब आठ किमी. की दूरी पर खेतुई के पास बाईपास का निर्माण स्वीकृत है। बाईपास कोर्रिया के पास शाहजहांपुर मार्ग से जुड़ेगा।बाईपास के बन जाने से लखनऊ मार्ग के साथ ही बिलग्राम, सांडी व सवायजपुर मार्ग से आने व इन मार्गों पर जाने वाले वाहनों को शहर के अंदर आने की आवश्यकता नहीं रहेगी। एनएचएआई ने भूमि अधिग्रहण के साथ ही बाईपास के लिए मिट्टी का काम भी शुरू कराया है।
बाईपास के स्वीकृत स्थल से शहर की ओर से तक मार्ग पर अभी कोई काम प्रस्तावित नहीं है। यह भाग लोक निर्माण विभाग को भी दिए जाने पर विचार चल रहा है। मार्ग के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी अमर उजाला के माध्यम से मिली है। जल्द ही इसे दिखवाया जाएगा और जो संभव होगा व काम कराया जाएगा।
बीपी पाठक, परियोजना निदेशक एनएचएआई बरेली खंड