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सब्जी मंडियों के सहारे आलू किसान

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हरदोई। जिले में पिछले एक दशक से आलू की खेती का रकबा बढ़ने के साथ ही औसत उत्पादन भी बढ़ा है, जिससे कोल्ड स्टोरेज की स्थापना के लिए सरकार से मिले अनुदान से कोल्ड स्टोरों की संख्या भी बढ़ी, लेकिन इसके बाद भी यदि कुछ नहीं बढ़ा तो वह है किसानों की आमदनी।
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इसके अलावा जिले में आलू मंडी न होने से इन किसानों को सब्जी मंडियों के सहारे ही अपना काम चलाना पड़ रहा है। इसके अलावा आलू के व्यापार में प्रतिस्पर्धा न बढ़ने से बाजार स्थानीय स्तर तक सीमित नजर आता है।
दरअसल जिले में आलू मंडी न होने से यहां आलू व्यापार में कोई बड़ी प्रतिस्पर्धा नहीं है। इससे जिले के आलू किसान स्थानीय सब्जी मंडियों पर निर्भर हैं। इसके साथ ही आलू मंडी वाले पड़ोसी जनपदों के सीमावर्ती किसान वहां की मंडियों पर निर्भर रहते हैं।
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इससे आलू की खेती के लिए प्रसिद्ध पड़ोसी जनपद फर्रुखाबाद एवं कन्नौज के मुकाबले जिले में आलू किसान व्यापारिक रूप से काफी कमजोर है, जिससे उसको अपनी उपज का वाजिब दाम भी नहीं मिल पता है।
जिले में एक दशक पहले आलू का रकबा करीब साढ़े आठ हजार हेक्टेयर था। जिसकी पैदावार औसतन 20 से 25 क्विंटल प्रति बीघा थी।
आलू की साल दर साल बढ़ती कीमतों ने किसानों को इस ओर आकर्षित किया तो आलू का रकबा बढ़कर करीब 13 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया और आलू के बीज आदि परिवर्तन से लेकर खादों के प्रयोग से आलू उत्पादन का औसत भी बढ़कर 30 से 35 क्विंटल प्रति बीघा पहुंच गया है।
जिसके चलते जिले में सरकारी अनुदान योजना के तहत कोल्ड स्टोर भी 23 से बढ़कर 28 हो गए हैं, लेकिन आलू किसानों को न तो बाजार मिल पा रहा और न ही उचित मूल्य मिलता है।
इन क्षेत्रों में होती आलू की खेती
जिले के संडीला, सांडी , शहाबाद, मल्लावां , बिलग्राम, माधौंगज ,हरपालपुर, सांडी, सवायजपुर आदि क्षेत्रों में सबसे ज्यादा आलू की खेती होती है । पचास हजार से अधिक किसान आलू की खेती से जुड़े हुए हैं ।
जिले में आलू की मंडी न होने के कारण यहां आलू के समुचित मूल्य के लिए किसानों को परेशान होना पड़ता है। आलू के शुरुआती टाइम में किसानों को औने पौने दामों पर बेंचने को मजबूर होते हैं ।
बिचौलियों को मिलता ज्यादा फायदा
जिले में आलू मंडी न होने से ज्यादातर किसानों को सब्जी मंडियों की ओर रुख करना पड़ता है। जहां स्थानीय व्यापारी आलू की कीमत तय करते हैं ।
बाहरी व्यापारियों के न आने से आलू का बाजार पूरी तरह से स्थानीय स्तर के हवाले रहता है और प्रतिस्पर्धा न होने से किसानों को व्यापारियों द्वारा लगाई जाने वाली कीमतों के अनुसार आलू बेंचना पड़ता है ।
इसके साथ बिचौलियों के सक्रिय होने से किसानों से ज्यादा बिचौलियों को फायदा हो जाता है ।
आलू मंडी की स्थापना के लिए वे लगातार मांग करते रहे हैं। 2010 में जब जिला मुख्यालय पर सब्जी मंडी स्थापित हुई थी, तब तत्कालीन गल्लामंडी व्यापार मंडल के अध्यक्ष वेद प्रकाश गुप्ता सहित तमाम लोगों ने आलू मंडी की मांग की थी।
तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त ने तत्कालीन मंडी सचिव देवतानाथ से इस ओर जरूरी कार्यवाही के निर्देश दिए थे। आलू मंडी न होने से किसानों को वाजिब दाम नहीं मिल पाता है। चुनाव के बाद आलू मंडी के लिए अफसरों से मिलकर मांगपत्र सौंपेंगे।
- सरोज दीक्षित, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय कृषक दल
सब्जी मंडियों से ही आलू की खरीद फरोख्त होती है। संडीला और हरदोई जिला मुख्यालय स्थित फल सब्जी मंडी में किसान आलू बेचते हैं। बिलग्राम के लिए सब्जी मंडी का खुलना प्रस्तावित है।
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आलू मंडी को लेकर कोई प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी नहीं है। मामले की जानकारी कर आगे की कार्यवाही कराएंगे।
- बब्लू लाल, मंडी सचिव
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