हरदोई। नॉटिंघम विश्वविद्यालय इंग्लैंड की प्रोफेसर मैडम एलुनेड एडवर्ड ने जिले के सर्वोदय आश्रम व गांधी भवन का भ्रमण कर बंदियों व जरूरतमंद महिलाओं द्वारा तैयार की गई कढ़ाई व शिल्प कार्य को गहनता से देखा। उन्होंने इसे देख वॉओ (बहुत बढ़िया) शब्द का प्रयोग किया व कहा कि वास्तव में भारत देश प्रतिभाओं का धनी है।
दो दिन जिले में रहीं प्रोफेसर एलुनेड ने सर्वोदय आश्रम आकर ऊषा इंटरनेशनल की मदद से संचालित तीन केंद्रों का भ्रमण किया। आश्रम अध्यक्ष उर्मिला श्रीवास्तव ने उन्हें बताया कि आश्रम लगभग 4-5 माह से बंदी बहनों को जेल में कढ़ाई सिखाने का कार्य कर रहा है, जिससे वो कढ़ाई का हुनर सीख कर अपने समय का उपयोग कर सकें। सिलाई सेंटरों के बाबत बताया गया कि ग्रामीण बहनें जिस प्रकार अभावग्रस्त समाज में सिलाई के जरिये खुद स्वावलंबी होकर दूसरों के लिये स्वावलंबन का रास्ता खोल रही हैं। प्रोफेसर ने कहा कि शिल्प की पारंपरिक समृद्धि को समझ कर उसके संरक्षण व संवर्धन के लिए कार्य करना उनके भ्रमण का उद्देश्य था। उन्होंने गांधी भवन जाकर गांधीजी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। उन्होंने बंदी बहनों द्वारा बनाए गए रुमालों में कढ़ाई को देखा। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से भारत देश प्रतिभाओं का धनी देश है। यहां की संस्कृति व सभ्यता उन्हें हमेशा से प्रभावित करती रही है पर अफसोस कि कला व शिल्प भारत ही नहीं हर देश से लुप्त होता जा रहा है। यह कलाएं अब सिर्फ जरूरतमंदों की रोजी-रोटी का ही हिस्सा बनती दिख रहीं हैं। देश दुनिया की सभ्यता संस्कृति के संरक्षण के लिए इन पर लगातार कार्य होना आवश्यक है।
सर्वोदय आश्रम की अध्यक्ष ने बताया कि अभी दुनिया में उन हस्त कलाओं पर कई जागरूक लोग व संस्थाएं कार्य कर रही हैं जो पारंपरिक कलाएं जागरूकता के अभाव में, आर्थिक लाभ न दे पाने के कारण व नई पीढ़ी के रुचि न ले सकने के कारण खत्म हो चुकी हैं या लगभग समाप्त प्राय हैं। प्रोफेसर भी उन्हीं में से एक हैं।
दुनिया की संस्कृति में टेक्सटाइल्स व ड्रेस विषय के लिए काम करने वाली प्रोफेसर एडवर्ड दुनिया का एक बड़ा नाम है, जिनके अंडर में लोग मास्टर्स और शोध करते हैं। इन्होंने बहुत समय तक कच्छ में काम किया है और वहां की संस्कृति को सहेजने में मदद की है। अभी वो फैब्रिक फेथ फैशन इन इंडिया विषय पर एक किताब लिख रही हैं जो लुप्त प्राय कलाओं को जीवनदायी बनाने का कार्य करेगी।