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कोरोना एलर्ट ने चिकित्सक को बना दिया कवि

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फोटो-28- डा. अंकित द्विवेदी। संवाद - फोटो : HARDOI
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हरदोई। लॉकडाउन के दौरान बहुत से लोगों के पुराने शौक उभरकर सामने आ रहे हैं। ऐसा ही कुछ हुआ डॉक्टर अंकित के साथ। लॉकडाउन के दौरान उनका ड्यूटी का समय बदला तो उनकी पुरानी कविता की डायरी खुल गई और एक बार फिर कलम पकड़ ली। उन्होंने कोरोना से बचाव पर ही दो कविताएं हाल में लिखी हैं जो चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
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मूलत: सांडी के ग्राम दस्यौली निवासी संतोष कुमार द्विवेदी के पुत्र डॉक्टर अंकित द्विवेदी इन दिनों शहर के ऊंचाथोक मोहल्ले में रह रहे हैं। वह शहर के एक अस्पताल में प्रेक्टिस कर रहे हैं। आम दिनों में उनकी ड्यूटी सुबह नौ बजे से रात 10 बजे तक रहती है। लॉकडाउन के दौरान उनकी ड्यूटी में बदलाव किया गया है। अब उन्हें शाम चार से रात 10 बजे तक की ड्यूटी दी गई है। ऐसे में सुबह से दोपहर तक का समय वह कविता लिखने में बिता रहे हैं। उन्होंने अपनी पुरानी डायरी खोल ली। बताया कि उनके मामा सतीश चंद्र मिश्रा सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। उन्हीं के पास रहकर उन्होंने शिक्षा शुरू की। वह बहुत सटीक लिखते थे। उनको पढ़कर उन्होंने हाईस्कूल से ही लिखना शुरू कर दिया। इंटर व बीएससी में उन्होंने कालेजों में कविता पाठ में हिस्सा लिया लेकिन डॉक्टरी की पढ़ाई में इतना व्यस्त हो गए कि उनकी कविता की डायरी बंद हो गई। उन्होंने कोरोना से देश को बचाने के लिए मां दुर्गे की एक प्रार्थना और कोरोना संक्रमण रोकने के लिए जनसंबोधन पर कविताएं लिखीं हैं। जो चिकित्सकों के बीच काफी सराही जा रहीं हैं।
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ये है कविता
मातु दुर्गे कल्याण हेतु प्रकटी हैं आप
चरणों मेें अपने प्रणाम मेरा लीजिए।
वायरस कोरोना महामारी को मिटाने हेतु
चिकित्सक बंधुओं को आत्मशक्ति दीजिए।
वायरस के भूत से समाज को बचाने हेतु
निज गृह वास करा संक्रमण रोकिए।
पास पास मिलकर काल को बुलावा दे दे
अज्ञानों को न ऐसा नाश करने दीजिए।
सैनिटाइजेशन प्रक्रिया अपनाए सब
स्वच्छ नियमों का अनुपालन कराइए।
आवश्यक कार्य हेतु बाहर गमन काल
में दूर दूर रहने का भाव लाइए।
भूखे असहाय दीनहीनों को बचाने हेतु
मातु जगदंबे सहयोग करवाइए।
ये भी काफी सराही गई
समय से मोदी जी का सावधान लॉकडाउन
देश को मरण विभीषिका से बचाना है।
संवाददाता संचार माध्यमों का भी
प्रयास देश कोरोना से मुक्त करवाना है।
पुलिस प्रशासन जुटा है देश सेवाहित
कर्म जनता को जीवनदान दिलवाना है।
धन्यवाद के सुपात्र भूरिश: प्रधानमंत्री
अंकित जागरूक होना काल को हटाना है।
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