सूबे की सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी जिले में
ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें बदहाल स्थिति में हैं। इन सड़कों पर कहीं दलदल
है तो कहीं गड्ढे ही गड्ढे बने हुए हैं, जिससे वाहन तो दूर अब पैदल निकलना
भी दूभर हो रहा है। इन क्षेत्रों के बाशिंदों में जनप्रतिनिधियों से लेकर बड़े अफसरों से सड़क ठीक कराने की गुहार लगाई, पर
नतीजा ढाक के तीन पात रहा।
अब तो हालत यह हो गई कि इन गांवों में बसें लोगों के यहां बेटे बेटियों की शादी करने से भी लोग कतराने लगे हैं। शाहाबाद
विकास खंड के नस्योली गांव से नौशहरा को जाने वाली सड़क तत्कालीन सांसद
ऊषा वर्मा ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से करीब 4 साल पहले स्वीकृत
कराई थी।
इस सड़क पर मिट्टी का कार्य हुआ, पर बाद में खानापूरी कर निपटा दी
गई। आज आलम यह है कि इस सड़क पर करीब डेढ़ किमी तक बने दलदल से वाहन भी
नहीं निकल पाते, जिससे लोगों को यह दूरी पैदल ही तय क रनी पड़ती है। इस रोड
पर ऐतिहासिक अटेरिया बाबा के मंदिर पर जाने को भक्तों को दलदल से होकर
गुजरना पड़ रहा है।
गांव के सौरभ सिंह, मुनेंद्र सिंह, राजपाल सिंह,
सुरेंद्र राजपूत, बल्ला राजपूत आदि का कहना है कि सड़क बनवाने को क्षेत्रीय
जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक गुहार लगा चुके है, अब तो इस गांव में
लोग बेटे बेटी की शादी करने से भी कतरा रहे हैं।
कटियारी
क्षेत्र के गांव मिघौली तक जाने के लिए लोगों को बेहद परेशान होना पड़ रहा
है। कारण साफ है कि करीब दस से बारह किमी लंबे इस रूट पर चार किलोमीटर की
सड़क दलदल में तब्दील रहती है। कई बार इस सड़क को बनवाने के लिए अफसरों ने
गुहार लगाई, पर नतीजा सिफर रहा।
क्षेत्रीय बसपा विधायक रजनी तिवारी ने भी
इस ओर कभी ध्यान देने की जहमत नहीं उठाई। आज आलम यह है कि इस सड़क से जुड़े
करीब आधा सैकड़ा गांव के बाशिंदों को दलदल से होकर गुजरना पड़ रहा है।
हैरत की बात है कि स्कूल जाने वाले बच्चे आए दिन इस सड़क पर गिरते हैं, फिर
भी जिम्मेदार बेखबर हैं।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर रोष है कि चुनाव के
वक्त किए गए वादों को जीतने के बाद जनप्रतिनिधि भूल जाते है। गांव के
निर्मल सिंह यादव, रामपाल यादव, जगत नारायण अवस्थी, तेजेंद्र शुक्ला, अयूब
कुरैशी, हरिशंकर ने डीएम से सड़क बनवाने की मांग की।
विकास खंड क्षेत्र के गंज जलालाबाद मार्ग का निर्माण करीब चार दशक पहले कराया
गया था। जिसमें उस समय मानकविहीन निर्माण कार्य कराने के कुछ समय बाद से
ही सड़क का डामर गायब हो गया और यह मार्ग बड़े बड़े गड्ढों में तब्दील हो
गया और नसीरपुर पुलिया से लालपुर तक उस समय डामरीकरण न करके बड़े-बड़े
नुकीले पत्थरों को डाल दिया गया था।
तब से आज तक इस मार्ग पर बड़े-बड़े
पत्थर पड़े हुए हैं और बाइक सवार फिसल कर गिरकर चुटहित हो जाते हैं। खास
बात यह है कि उन्नाव जिले के गंज मुरादाबाद कसबे को जोड़ने वाले इस मार्ग
से प्रतिदिन परिवहन विभाग की दर्जनों बसे दिल्ली जाती है।
इस सड़क के
निर्माण को लेकर कई बार ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक से लेकर सांसद को
अवगत कराया गया, पर किसी भी जनप्रतिनिधि के ध्यान न देने से इस क्षेत्र की
जनता अपने को ठगा सा महसूस कर रही है। बरसात के समय पर लोगों को गंज
मुरादाबाद जाने को बाया मल्लावां होकर अतिरिक्त 20 किमी चक्कर लगाकर जाना
पड़ता है।