फोटो-07- मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में मरीज को दी जा रही प्लांट से ऑक्सीजन। संवाद
फोटो-08- ऑक्सीजन प्लांट। संवाद
- कन्संट्रेटर और सिलिंडर पर समाप्त हुई निर्भरता, इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को भी राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। ऑक्सीजन के लिए फिलहाल सिलिंडर और कंसंट्रेटर की जरूरत नहीं रहेगी। खामियां दूर कराकर इमरजेंसी वार्ड में हर बेड तक ऑक्सीजन प्वाइंट तक सीधे प्लांट से ही ऑक्सीजन पहुंचाई जाने लगी है।
मेडिकल कॉलेज के गेट के पास बने पीकू वार्ड के पास ऑक्सीजन प्लांट लगा है। 500 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन की क्षमता वाले इस संयंत्र इमरजेंसी के अतिरिक्त आईसीयू वार्ड में भी सप्लाई होनी है। अभी तक यह प्लांट काम नहीं कर रहा था। इससे मरीजों को कंसंट्रेट और सिलिंडर की मदद से ऑक्सीजन दी जा रही थी।
वहीं मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को भी ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाने पर काफी खर्च करना पड़ रहा था। ऑक्सीजन प्लांट की खामियों को दूर कर तीन माह पहले ही प्लांट चालू कर दिया गया था, लेकिन सप्लाई के लिए पाइप लाइन टूटी होने की वजह से बेडों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच रही थी। अमर उजाला में इसको लेकर कई बार खबर भी प्रकाशित की। अब पाइप लाइन दुरुस्त कर दी गईं और वार्ड के अंदर बेड तक लगे ऑक्सीजन सप्लाई के प्वाइंट से ऑक्सीजन मिलने लगी है। इसके बाद से अब मरीजों की ऑक्सीजन के लिए कंसंट्रेटर और सिलिंडर की निर्भरता खत्म हो गई है।
सिलिंडर भरवाने में खर्च हो रही थी भारी भरकम राशि
इमरजेंसी में सिलिंडर और कंसंट्रेटर से मरीजों को ऑक्सीजन मिल रही हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार एक सिलिंडर को भरवाने पर 400 से 450 रुपये खर्च होते हैं। निजी स्तर पर सिलिंडर भरवाए जाते हैं और हर सप्ताह करीब 40 से 50 सिलिंडर भरकर आते हैं। इस पर हर माह अच्छी खासी धनराशि भी खर्च हो जाती है।
वर्जन
संयंत्र से इमरजेंसी तक आने वाले पाइप लाइन को बदलकर बेडों तक प्वाइंट के माध्यम से ऑक्सीजन पहुंचाई जाने लगी है। बेडों तक ऑक्सीजन पहुंचने से मरीजों को राहत मिली है और सिलिंडरों की निर्भरता भी कम हुई।-डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज