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Hardoi News: लाभ की खेती साबित हो रही पिपरमिंट, मवेशी भी नहीं पहुंचाते नुकसान

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मल्लावां। मेंथा (पिपरमिंट) की खेती क्षेत्र के किसानों के लिए लाभ का सौदा साबित हो रही है। पिपरमिंट की फसल को मवेशी भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इससे किसानों को रखवाली करने की चिंता कम करनी पड़ती है। कम लागत में अधिक मुनाफा देने के कारण पिपरमिंट की खेती किसानों को भा गई है। इस साल किसानों ने करीब 125 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पिपरमिंट की पौध लगाई है।
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पिपरमिंट से होने वाली आमदनी ने किसानों का मन मोह लिया है। पहले पिपरमिंट की खेती बंदायू, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और बाराबंकी आदि जनपदों में होती थी। कुछ साल पहले पिपरमिंट फसल की शुरुआत क्षेत्र में हुई और समय के साथ अब अधिक खेतों में दिखने लगी है। मढ़िया गांव निवासी विजय कुमार, माहिमपुर निवासी बबलू विनोद समेत अन्य किसानों ने बताया कि जब इस फसल की शुरुआत की गई तो लोगों के लिए एकदम नई फसल थी।
फसल की पेराई के लिए दूर-दराज लगे वाष्पन प्लांट पर जाना होता था। फसल के प्रति किसानों की रुचि और अधिक फसल होने के कारण अब जगह-जगह पर वाष्पन के प्लांट उपलब्ध हैं। बताया कि पिपरमिंट के लिए बलुई दोमट और मटियार दोमट भूमि उपयुक्त रहती है। खेत समतल होना चाहिए। पौध तैयार करने का उचित समय 15 जनवरी से 15 फरवरी है। देर से बुआई कर तैयार की गई पौध में तेल की मात्रा कम हो जाती है। पौध तैयार हो जाने पर इसकी रोपाई मार्च से अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह तक हो जानी चाहिए।
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पिपरमिंट की रोपाई लाइन में की जाती है। ऐसे में लाइन से लाइन की दूरी 45 से 60 सेंटीमीटर और पौध से पौध की दूरी 15 सेंटीमीटर रखना चाहिए। इस फसल की अच्छी उपज के लिए 120 से 150 किलो नाइट्रोजन, 50 से 60 किलोग्राम फॉस्फोरस, 40 किलोग्राम पोटाश, 20 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग की जानी चाहिए। फसल में दीमक लगने पर क्लोरपायरीफॉस 4-5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के साथ प्रयोग करें। बालदार सुंडी लगने पर इन डाईक्लोरपॉस 500 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 600 से 700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
पहली कटाई लगभग 100 से 120 दिन पर जब पौधों में कलियां आने लगे तब करना चाहिए। दूसरी कटाई पहली कटाई से 70 से 80 दिन बाद की जाती है। फसल की दो कटिंग करने पर करीब 125 से 150 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से तेल निकल आता है। तेल की बिक्री स्थानीय मंडी के अलावा लखनऊ, कानपुर समेत अन्य जगहों पर आसानी से हो जाती है। बाजार से एक हजार से लेकर 1,500 रुपये प्रति लीटर की दर से तेल बिकता है। पिपरमिंट की जड़ भी बाजार में 30 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव में बिक जाती है।
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