राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के क्रियान्वयन को लेकर जहां
एक ओर शासन से लेकर प्रशासन के आला अधिकारी काफी जोर आजमाइश कर रहे, वहीं
ग्राम स्तरीय कर्मचारी योजना के अंतर्गत राशन कार्डों के सत्यापन को लेकर
अधिक रचि ही नहीं ले रहे। जिससे राशन कार्डों के सत्यापन का कार्य अधर में
अटका है।
संडीला तहसील के विकास खंडों में की गई समीक्षा में कम प्रगति
होने पर एसडीएम ने ग्राम स्तरीय कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए
कार्यवाही की चेतावनी दी। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के
बाद अब महिला प्रधान के नाम से राशन कार्डों को बनाया जाना है। जिसको लेकर
राशन कार्डाें के सत्यापन कराया जाना है।
राशन कार्डों का सत्यापन सभी
विकास खंडों के ग्रामीण क्षेत्रों में किया जा रहा है। सत्यापन कार्य ग्राम
स्तरीय अधिकारियों में सचिवों व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से कराया जा रहा
और संबंधित विभागों की सीडीपीओ, बीडीओ सत्यापन की मानीटरिंग कर रहे हैं, पर
जनपद में मानीटरिंग का कार्य तेजी नहीं पकड़ पा रहा है।
तहसील संडीला के
अंतर्गत आने वाले विकास खंडों में संडीला, बेहंदर, कछौना और भरावन में राशन
कार्डों के सत्यापन कार्य की समीक्षा एसडीएम संजीव कुमार ने की। सत्यापन
की प्रगति बेहतर न होने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और मातहतों से कहा
कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के क्रियान्वयन के लिए एसडीएम को अध्यक्ष और
बीडीओ को सदस्य नामित किया गया है।
योजना के अनुसार केंद्र सरकार से
प्राप्त सूची व राशन कार्डों को खंड विकास अधिकारी के माध्यम से सत्यापन
कराया जाना है। जिसके बाद कार्डों को तहसील पर जमा कराया जाना है, पर कई
बार समीक्षा के बाद भी न तो सत्यापन रिपोर्ट आ रही है और न ही समस्त
अधिकारी मौजूद हो रहे हैं।
बैठक में सीडीपीओ द्वारा बताया गया कि ग्राम
विकास अधिकारी व ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा राशन कार्ड के सत्यापन में
रूचि नहीं ले रहे और सभी कार्य आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पर ही छोड़ दिए गए
हैं और बीडीओ स्तर से भी कोई समीक्षा नहीं की जा रही है।
बैठक में इस
प्रकार की शिकायतें आने पर एसडीएम संडीला ने सरकार के कार्य में रुचि बरतें
और रुचि न लेने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।