हरदोई। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में एक्सरे कराने में मरीजों को सहूलियत नहीं मिल रही है। डिजिटल मशीन बीते डेढ़ माह से खराब पड़ी है और मरीजों को पोर्टेबल मशीन से एक्सरे निकलवाने पड़ रहे हैं। मरीजों को घंटाें इंतजार करने के बावजूद एक्सरे फिल्म तक नहीं मिलती है।
एक्सरे विभाग में लगी डिजिटल मशीन का प्रिंटेड सर्किट बोर्ड पैनल (पीसीबी) खराब हो चुका है। पीसीबी पैनल पर करीब पांच लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। डिजिटल एक्सरे मशीन बीते माह खराब हुई थी और डेढ़ माह बीत चुका है। मरीजों के एक्सरे पोर्टेबल मशीन से लिए जा रहे हैं। मरीजों को एक्सरे के बाद फिल्म भी नहीं मिलती है और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। पोर्टेबल से एक बार में अधिकतम 65 से 70 मरीजों के 135 से 140 एक्सरे हो पा रहे हैं। डिजिटल मशीन से 200 से 250 मरीजों के 450 से अधिक एक्सरे भी आराम से और जल्दी हो जाते हैं। पोर्टेबल मशीन पर ओवरलोड होने उसे एक घंटे बंद भी करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को परेशान होना पड़ता है।
दो मशीनों से लिया जा रहा काम
हरदोई। एक्सरे कराने के लिए रोजाना 150 से अधिक मरीज आ रहे हैं। पोर्टेबल मशीन पर अधिक लोड न पड़े, इसके लिए सीने से संबंधित एक्सरे एक पोर्टेबल मशीन से हो रहे हैं, जबकि अन्य सभी एक्सरे दूसरी मशीन से हो रहे हैं। काम तो दोनों मशीनों से लिया जा रहा है, लेकिन ओपीडी, आईपीडी और दुर्घटना में घायल मरीजों की संख्या में वृद्धि होने से मशीन को बंद कर चलाना पड़ता है। इसमें मरीजों को इंतजार करना पड़ता है।
फिल्म के लिए निजी लैब में जाना मजबूरी
हरदोई। पाेर्टेबल मशीन में एक्सरे कराने पर फिल्म नहीं मिलती है। मोबाइल पर एक्सरे की फोटो दे दी जाती है। फोटो लेने पर कई बार रिपोर्ट साफ भी नहीं आती। इससे मरीज को निजी लैबों से जांच कराना पड़ता है। निजी लैब पर एक बार एक्सरे कराने में 500 से 900 रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में मरीज को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से भी परेशान होना पड़ रहा है।
डिजिटल एक्सरे मशीन को बनाने के लिए ऑर्डर दिया जा चुका है। कार्यदायी संस्था को बजट मिलते ही डिजिटल मशीन की मरम्मत का काम शुरू करा दिया जाएगा। एक बार मशीन बनने के बाद मरीजों को भी सहूलियत मिल जाएगी। -डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज