फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hardoi News: जन आरोग्य मेलों में नहीं हो पा रही मरीजों की जांच, डॉक्टर हैं पर लैब टेक्नीशियन नहीं

विज्ञापन
 फोटो-07- धर्मशाला सड़क पर जन आरोग्य मंदिर पर मौजूद चिकित्सक व कर्मचारी। संवाद - फोटो : चंद्रवाड़ महोत्सव की गठित की गई नवीन कार्यकारिणी। स्रोत: संस्था
विज्ञापन
हरदोई। मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला, कभी इस मेले को लेकर न सिर्फ स्वास्थ्य महकमे के बल्कि प्रशासनिक अधिकारी भी गंभीर रुख दिखाते थे। धीरे-धीरे प्रशासनिक अफसरों ने इस ओर निगाह लगाना बंद किया तो स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने मेले को पूरी तरह औपचारिक बना डाला। आरोग्य मंदिरों में 14 प्रकार की जांचों के निर्देश हैं लेकिन किट की जांचों के अलावा कोई भी जांच नहीं हो पाती।
विज्ञापन




जनपद भर में करीब 300 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं। वहीं शहर में भी आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं। आरोग्य मंदिरों पर मरीज की डेंगू-मलेरिया, टीबी, यूरिन, टाइफाइड, शुगर, पीलिया, हेपेटाइटिस, बुखार समेत 14 प्रकार की जांचों को निशुल्क करने के आदेश हैं। कागजों पर तो हर सुविधा मिलने का दावा किया जा रहा है लेकिन हकीकत यह है कि शहर के आयुष्मान मंदिरों पर पर्याप्त स्टाफ नहीं है। लैब टेक्नीशियन न होने से चिकित्सक सिर्फ किटों से होने वाली ही जांच कर रहे हैं जबकि अन्य जांचों के लिए उन्हें मेडिकल कॉलेज या फिर निजी लैब जाना पड़ता है।



स्थान-1-

शहर की धर्मशाला सड़क पर नटवीर पुलिया के पास आरोग्य मंदिर है। यहां आरोग्य मेले के दौरान डॉ. अजय प्रताप सिंह मौजूद मिले। दोपहर 12 बजे तक 15 मरीज आए। फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन की तैनाती यहां नहीं है। मरीजों को स्टाफ नर्स आरती और वार्ड आया सरिता ने दवाइयां वितरित कीं। दावा है कि किट से जरूरी जांचें की गईं।
विज्ञापन



स्थान-2-

चंदीपुरवा में भी आरोग्य मंदिर है। यहां डॉ. ओसामा सिद्दीक मौजूद मिले। दावा है कि पौने 12 बजे तक 33 मरीजों को परामर्श दिया गया। डॉ. ने बताया कि बुखार, डिहाइड्रेशन से संबंधित मरीज आए। यहां लैब टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है और इस कारण मरीजों की जांचें नहीं हो पातीं। हालांकि फार्मासिस्ट नितिन पाल और स्टाफ नर्स अंजू की वजह से मरीजों को कुछ राहत मिल जाती है।


दोपहर तक पड़ जाता है ताला
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के संचालन में खानापूरी हो रही है। सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक इनका संचालन होना चाहिए लेकिन दोपहर एक बजे से ही केंद्र बंद होने लगते हैं।



आरोग्य मंदिरों पर स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए उच्चाधिकारियों से लगातार प्रयास किया जा रहा है। आरोग्य मेलों का आयोजन भी नियमित हो रहा है। औचक निरीक्षण कर आरोग्य मंदिरों की पारदर्शिता की जांच की जाती है। -डॉ. भवनाथ पांडेय, सीएमओ

 फोटो-07- धर्मशाला सड़क पर जन आरोग्य मंदिर पर मौजूद चिकित्सक व कर्मचारी। संवाद- फोटो : चंद्रवाड़ महोत्सव की गठित की गई नवीन कार्यकारिणी। स्रोत: संस्था

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें