फोटो- 22- हड्डी रोग विभाग की ऑपरेशन थियेटर के बाहर खडे़ मरीज। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के आपसी खींचतान और प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मंगलवार को एनेस्थीसिया न मिलने से मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो सके। सर्जरी के लिए तैयार मरीजों के ऑपरेशन न होने से थिएटर के अंदर मरीज घंटों इंतजार करते रहे और बाद में लौट गए। इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य ने सर्जन व एनेस्थेटिस्ट समेत सीएमएस को भी कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
मेडिकल कॉलेज के हड्डी विभाग में डॉक्टरों के बीच ऑपरेशन में खींचतान का विवाद काफी लंबे समय से होता चला आ रहा है। इसके पहले भी इंप्लांट को लेकर विवाद हुआ था तो विभागाध्यक्ष ब्रह्म प्रकाश की कुर्सी चली गई थी और विभाग की जिम्मेदारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को सौंप दी गई थी। एक बार फिर इन्हीं आर्थो सर्जन का एनेस्थेटिस्ट चिकित्सक के बीच विवाद सामने आ गया। बता दें कि मंगलवार को करीब सात मरीजों का ऑपरेशन किया जाना था। सर्जरी की पूरी तैयारी कर ली गई थी। हड्डी विभाग सर्जन का दावा है कि एनेस्थेटिस्ट ने मरीजों को हाई रिस्क बता कर एनेस्थीसिया नहीं दी और ऑपरेशन टल गए।
हालांकि इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि मंगलवार को एनेस्थेटिस्ट डॉ. परलव की ड्यूटी थी लेकिन वो अवकाश पर थे। इस वजह से एसआर डॉ. मोहसिन को आना था लेकिन वो भी नहीं आए इसलिए डॉ. स्नेहा ऑपरेशन थिएटर पहुंचीं और मरीजों की जांच की। ऐन वक्त पर एनेस्थेटिस्ट के इन्कार के बाद पूरी प्रक्रिया ठप पड़ गई। इस मामले में अब मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ. जेबी गोगोई ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्म प्रकाश, एनेस्थेटिस्ट डॉ. स्नेहा और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चंद्र कुमार तीनों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
कई महीनों से चल रहे विवाद में हड्डी रोग विभाग में डॉक्टरों की गुटबाजी काफी पुरानी है। विभाग में अन्य डॉक्टरों के बीच ऑपरेशन और इंप्लांट को लेकर खींचतान जारी है। वहीं आर्थों सर्जन और एनेस्थेटिस्ट के बीच विवाद भी चलता आ रहा है। इस मामले में एनेस्थेटिस्ट डॉ. स्नेहा ने मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य से शिकायत भी की फिर भी सुधार नहीं हुआ। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
विभागीय डॉक्टरों की बुलाई बैठक
बुधवार को प्रधानाचार्य डॉ. जेबी गोगोई ने हड्डी विभाग के संबंधित डॉक्टर और एनेस्थेटिस्ट के अलावा सीएमएस को बुलाकर एक बैठक की। इसमें विवाद को सुलझाने का प्रयास किया गया। प्रधानाचार्य ने बताया कि डॉक्टरों को निर्देशित किया गया है कि वह लोग मरीजों के ऑपरेशन में कोताही न बरतें।