फोटो- 16- मेडिकल कॉलेज का अल्ट्रासाउंड कक्ष। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सीमित सुविधा के कारण मरीज और गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए दो से तीन दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। पेट दर्द के मरीज और गर्भस्थ शिशु से संबंधित जांच कराने पहुंचने वालीं महिलाओं को तत्काल सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में आर्थिक रूप से सक्षम मरीजों को निजी जांच केंद्र जाना पड़ता है जबकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है।
जिले की सबसे बड़ी स्वास्थ्य इकाई मेडिकल कॉलेज में जांच व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो रहा है। सर्जरी विभाग और महिला अस्पताल से रोजाना करीब 100 से 150 मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी जाती है लेकिन सभी मरीजों का अल्ट्रासाउंड उसी दिन नहीं हो पाता। अल्ट्रासाउंड के लिए मेडिकल कॉलेज में समय निर्धारित है। एक तो अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ही अल्ट्रासाउंड करते हैं। उस पर अल्ट्रासाउंड सिर्फ सुबह नौ से दोपहर दो बजे तक होते हैं। मरीजों की अधिक संख्या और निर्धारित समय हाेने का खामियाजा मरीजों और गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए 160 से 175 मरीजों की प्रतीक्षा सूची चल रही है। इस वजह से मरीज को नंबर देकर दो से तीन दिन बाद बुलाया जाता है। समय पर जांच नहीं हो पाने से उन्हें बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
गर्भवतियों का नहीं होता टीफा अल्ट्रासाउंड
मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड की सुविधा सिर्फ औपचारिकता तक सीमित है। गर्भावस्था के दौरान शिशु के स्वास्थ्य, विकास और गर्भ में उसकी स्थिति की जानकारी के लिए छह से 12 सप्ताह के बीच पहली जांच। इसके बाद 18 से 20 सप्ताह के बीच शिशु के शारीरिक अंगों के विकास और बनावट की जांच और गर्भावस्था के 32 से 36 सप्ताह के बीच तीसरा अल्ट्रासाउंड कर शिशु के अनुमानित वजन, गर्भ में पानी की मात्रा और प्रसव से जुड़ी स्थिति का आकलन किया जाता है। तीसरी जांच को टीफा बोला जाता है लेकिन यह जांच मेडिकल कॉलेज में नहीं होती है। महंगी जांच होने के बावजूद गर्भवतियों को निजी केंद्रों पर 3000 से 3500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
केस-1-
हरियावां से आईं सोनाक्षी को पेट में दर्द हो रहा था। डॉक्टर की सलाह पर अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचीं लेकिन उन्हें तीन दिन बाद की तारीख दी गई। सोनाक्षी ने बताया कि जब तक अल्ट्रासाउंड की जांच नहीं हो पाएगी तब तक उपचार शुरू नहीं होगा।
केस-2-
ओदरा पचलाई निवासी ज्योति ने बताया कि गर्भावस्था की जांच कराने आए ऐ लेेकिन तत्काल जांच के लिए मना कर दिया गया है। दो दिन बाद की तारीख दी गई है। बार-बार आने-जाने में समय और किराया खर्च होता है। अब सोमवार को ही जांच करवाकर दिखाएंगे।
मेडिकल कॉलेज में स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती का प्रयास किया जा रहा है। शासन को पत्र भी भेजा गया है। जल्दी ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा का समय बढ़ाया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य