हरदोई। मेडिकल कॉलेज में पीकू वार्ड के पास लगे 500 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता का संयंत्र महज शोपीस बनकर रह गया है। संयंत्र संचालित होने के बावजूद इमरजेंसी में मरीजों को ऑक्सीजन के लिए कंसंट्रेटर और सिलिंडरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। वहीं ऑक्सीजन संयंत्रों का काम महज मरम्मत तक सीमित रह गया है। ऐसे में ऑक्सीजन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए लगाए गए संयंत्रों की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के गेट के पास बने पीकू वार्ड के पास ऑक्सीजन संयंत्र लगा है। 500 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन की क्षमता वाले इस संयंत्र से आईसीयू समेत बच्चों के पीआईसीयू वार्ड के अतिरिक्त इमरजेंसी में भी ऑक्सीजन की आपूर्ति की जानी है। आईसीयू में तो ऑक्सीजन की सप्लाई पाइपों से हो रही है लेकिन पीआईसीयू और इमरजेंसी वार्ड में सप्लाई अभी नहीं की जा रही है। जबकि वार्ड के अंदर हर बेड तक ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए पॉइंट भी बने हैं।
इसके बाद भी मरीजों को ऑक्सीजन के लिए कंसंट्रेटर और सिलिंडर के भरोसे रहना पड़ रहा है। दरअसल प्लांट से वार्ड तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए डाली गई पाइप लाइन बीते करीब छह माह से क्षतिग्रस्त है। ऐसे में इन वार्डों में मरीजों को संयंत्र से मिलने वाली ऑक्सीजन नहीं मिल रही है।
संयंत्रों की नियमित मरम्मत पर खर्च हो रहा बजट
शासन की तरफ से मेडिकल कॉलेज के ऑक्सीजन संयंत्रों की मरम्मत की जिम्मेदारी के लिए कार्यदायी संस्था का चयन किया गया है। यह संस्था नियमित रूप से संयंत्रों की मरम्मत करती है। संस्था से जुड़े कर्मचारी ने बताया कि हर तीन माह में संयंत्र की मरम्मत होती है और केमिकल और अन्य सामग्री पर कम से कम 25 से 30 हजार रुपये का खर्च आ जाता है। यह खर्च कार्यदायी संस्था ही वहन करती है।
सिलिंडर भरवाने में खर्च हो रही थी भारी राशि
इमरजेंसी में सिलिंडर और कंसंट्रेटर से मरीजों को ऑक्सीजन मिल रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार एक सिलिंडर को भरवाने पर 400 से 450 रुपये खर्च होते हैं। निजी स्तर पर सिलिंडर भरवाए जाते हैं और हर सप्ताह करीब 40 से 50 सिलिंडर भरकर आते हैं। इस पर हर माह अच्छी खासी धनराशि भी खर्च होती है।
रेड जोन में भी नहीं पाइप से सप्लाई
इमरजेंसी के ट्राइएज एरिया में ऑक्सीजन की पाइपलाइन नहीं बिछी है। वहीं रेड जोन एरिया में पाइप लाइन होने के बावजूद ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं होती है। बता दें कि रेड जोन में सांस रोग से पीड़ित गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाता है। जिन्हें हर वक्त ऑक्सीजन की जरूरत होती है लेकिन रेड जोन में कंसंट्रेटर और सिलिंडर के भरोसे मरीजों का उपचार हो रहा है। बृहस्पतिवार को भी लालपालपुर से आई मरीज सावित्री को सिलिंडर से और हरदासपुर से आए गोकरन का कंसंट्रेटर से ऑक्सीजन की सप्लाई देकर उपचार होता नजर आया।
इमरजेंसी तक जाने वाली क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। वार्ड में जल्द ही पाइप लाइन से ऑक्सीजन सप्लाई शुरू कराई जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य