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हमारे शिवालय : देसी घी अर्पित करने से प्रसन्न होते श्रीजागेश्वर महादेव

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हरदोई। एक लोटा जल से प्रसन्न होने वाले भोले बाबा भाव से अर्पित की गई सामग्री को स्वीकार कर लेते हैं। करीब 504 साल पुराने अतरौली के श्रीजागेश्वर महावेद शिवलिंग पर देसी घी अर्पित करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्रीजागेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध मंदिर पर सावन माह में बड़ी संख्या में शिवभक्त आते हैं।
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अतरौली में करीब 504 साल पहले चरवाहों ने इस श्रीशिवलिंग को पहली बार देखा था। ऊंचाई पर श्रीशिवलिंग और जंगल होने के कारण आम लोगों का इस ओर कम ही आना-जाना रहता था। चरवाहों की ओर से देखे गए श्रीशिवलिंग की चर्चा लोगों तक पहुंची। ऐसी मान्यता है कि यहां किए गए दर्शन-पूजन उत्तराखंड के श्रीजागेश्वर महादेव के दर्शन के बराबर माना जाते हैं। यहां आने वाले सभी शिवभक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्रीजागेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी राजकुमार दीक्षित ने बताया कि वर्ष 1520 में अतरौली में जंगल था। जंगल में आसपास के गांवों के लोग मवेशी चराने आते थे। चरवाहों ने ही ऊंचाई पर श्रीशिवलिंग को देखा था।
अंग्रेजी शासन काल में अतरौली के हरिराज सिंह ने शिवलिंग के दर्शन किए थे और कुछ दिन बाद उन्होंने मंदिर बनवाया था। करीब 120 वर्ष पहले मंदिर पर यज्ञ हुआ। मान्यता है कि श्रीबाणेश्वर सोणितपुर पर घी चढ़ाया जाता है वह घी श्रीजागेश्वर महादेव पर चढ़ता था। श्रीजागेश्वर महादेव की मान्यता और प्रसिद्धि फैलने पर सन 1947 में बलदेव सिंह ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। कुछ साल पहले गांव के ही प्रदीप सिंह ने भी मंदिर का जीर्णोद्धार कराने के साथ ही पुजारी के लिए एक कमरा, शौचालय, बाउंड्रीवॉल और गेट बनवाया था।
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अतरौली के श्रीजागेश्वर महादेव मंदिर में प्रत्येक सोमवार को श्रीशिवलिंग का भव्य शृंगार होता है। भगवान भोलेनाथ का शृंगार कराने के लिए श्रद्धालु भी आते हैं। सावन में मंदिर में मत्था टेकने वाले शिवभक्तों पर भगवान श्रीजागेश्वर महादेव की कृपा रहती है।
हरदोई। आज सावन का तीसरा सोमवार है। शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी। भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए रविवार को कांवड़ यात्रा निकलीं। शिवभक्त गंगाजल लाने के लिए गंगाघाटों के लिए रवाना हुए। डीजे पर भजनों की धुनों पर कांवड़िया थिरकते हुए मार्गों से गुजरे। झांकियों ने लोगों का मन मोहा।
ब्रह्मदेव कांवरिया ग्रुप की ओर से 14वीं विशाल कांवड़ यात्रा निकाली गई। अनुराग द्विवेदी, जागेश्वर कश्यप, चेतना शुक्ला, पप्पू बाजपेयी, श्रीश चंद्र कनौजिया, डॉ. अरुण मिश्रा, अनिल सिंह आदि श्रद्धालु शामिल रहे। पिहानी प्रतिनिधि के अनुसार, सलेमपुर गांव से 14वीं कांवड़ यात्रा राजघाट से आकर गांव के एक दिन के पड़ाव के बाद जलाभिषेक के लिए गोकर्णनाथ को रवाना हुई। यात्रा में अनुपम, गणेश, सतीश बाबू, शिवकरन, अंशुल, गोलू , सेवा सहित बड़ी संख्या में कांवड़िये शामिल रहे। डर्रा गांव के पास एक ब्रिक फील्ड पर लाेगों ने पुष्प वर्षा कर कांवड़ यात्रा का स्वागत किया, भंडारा हुआ। अनिल त्रिपाठी, महेश कुमार, सूरज द्विवेदी व अमरेश आदि मौजूद रहे।
सांडी प्रतिनिधि के अनुसार, कांवड़ यात्रा में भक्त खुशी-खुशी झूमते-नाचते हुए साथियों के साथ निकल रहे हैं। सांडी से गोला गोकर्णनाथ गई कांवड़ यात्रा लोगों को खूब पसंद आई।
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