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Hardoi News: 11 साल पुरानी जर्जर मशीन के भरोसे व्यवस्था, एक माह से मशीन खराब, नई पर लटका ताला

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फोटो- 32- आईपीडी भवन में एक्सरे कक्ष के बाहर पड़ा ताला। संवाद
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हरदोई। स्वास्थ्य विभाग के दावों की हवा निकालती एक बानगी मेडिकल कॉलेज के एक्सरे विभाग में देखने को मिल रही है। यहां पिछले 11 सालों में खटारा हो चुकी एक्सरे मशीन बार-बार खराब हो रही है जबकि लाखों रुपये की लागत से आई नई मशीन बंद कमरे में धूल फांक रही है। बीते एक महीने से डिजिटल मशीन खराब पड़ी है। पोर्टेबल मशीनों से जैसे-तैसे व्यवस्था को चलाया जा रहा था लेकिन अब वह भी बंद है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को एक्सरे के लिए निजी सेंटरों पर जाकर मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
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मेडिकल कॉलेज बनने से पहले जुलाई 2015 में जिला अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में डिजिटल एक्सरे मशीन लगाई गई थी। पांच साल पहले जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध करने पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की आस जगी थी लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते व्यवस्थाओं में कुछ खास बदलाव नहीं आया।
11 साल पुरानी एक्सरे मशीन अपनी मियाद पूरी कर चुकी है। आए-दिन इसमें कोई न कोई तकनीकी खराबी आती रहती है। बीते 12 अगस्त से डिजिटल एक्सरे मशीन खराब है। पहले इसका ड्रैग बोर्ड बदला गया लेकिन ट्रायल के दौरान ही एक्सरे ट्यूब खराब हो गई। इस वजह से एक्सरे शुरू नहीं हो सके। अभी तक पोर्टेबल मशीन से एक्सरे हो जाते थे लेकिन वह मशीन भी खराब होने से ओपीडी के मरीजों के लिए सुविधा बंद हो गई है। ऐसे में मरीज निजी सेंटरों पर जांच कराने के लिए दौड़ रहे हैं।
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आईपीडी भवन में धूल फांक रही नई मशीन
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अंत: रोगी विभाग की 160 बेडों की नवीन इमारत में मरीजों की सहूलियत के लिए नई डिजिटल मशीन लगवाई है। इसके बाद भी इसका संचालन नहीं हो रहा। अभी तक मशीन का संचालन विद्युत कनेक्शन का हवाला देकर नहीं किया गया था। वह समस्या तो दूर हो गई है अब स्टाफ और संसाधनों की कमी की बात कही जा रही है। विभागीय उदासीनता और तकनीकी प्रक्रिया का अड़ंगा ऐसा फंसा है कि नई मशीन को चालू करने के बजाय उसे एक कमरे में बंद कर ताला जड़ दिया गया है। एक तरफ मरीज परेशान होकर भटक रहे हैं तो दूसरी ओर अधिकारी संसाधनों का अभाव बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।


निजी सेंटरों के चक्कर काटना मजबूरी
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना सैकड़ों मरीज हड्डी रोग व अन्य जांचों के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें इमरजेंसी और आईपीडी में भर्ती होने वाले मरीजों का एक्सरे 50 एमए की पोर्टेबल मशीन से हो जाता है लेकिन ओपीडी के मरीजों का एक्सरे नहीं किया जा रहा है। ऐसे में उनके पास बाहर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर गरीब मरीजों से एक्सरे के नाम पर 400 से 800 रुपये तक वसूले जा रहे हैं जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।


डिजिटल एक्सरे मशीन को ठीक कराने की प्रक्रिया चल रही है। एक्सरे ट्यूब उपलब्ध होते ही मशीन को दुरुस्त कर जांच सेवा सामान्य कराने का प्रयास किया जाएगा। नई मशीन के संचालन के लिए स्टाफ और अन्य व्यवस्थाएं जल्द ही की जाएंगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य

फोटो- 32- आईपीडी भवन में एक्सरे कक्ष के बाहर पड़ा ताला। संवाद

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