मौसम के मिजाज बदल रहे हैं और गर्मी का आगाज हो रहा
है। जिस तरह से सामान्य हो रहे तापमान ने गर्मी के मौसम शुरू होने की आहट
दे दी है, उससे संकेत मिल रहे कि जल्द ही गर्मी अपनी पूरी रंगत में होगी।
जब गर्मी अपनी रंगत में होगी तो साफ है कि पेयजल की मांग बढ़ेगी और तब
लोगों के लिए समस्या भी हो सकती है, क्यों कि जिले 5 से 10 फीसदी हैंडपंप
खराब है। कोई हैंडपंप बालू उगल रहा, तो कोई बिल्कुल डेड पड़ा है। ऐसे
में गर्मी बढ़ने के साथ गिरने वाले जल स्तर से और दिक्कतें बढ़ेंगी।
ज्ञात
हो कि 40 लाख आबादी वाले इस जिले में करीब 46 हजार हैंडपंप लगे हुए हैं। यह
अलग बात है कि यह आंकड़ों का खेल हो सकता है। जिले में हजारों हैंडपंप
लगने के बाद भी गरीबों के लिए आसानी के साथ पेयजल मिलना अभी हकीकत से कोसों
दूर है।
यही कारण है कि गर्मी के मौसम में जब खराब गुणवत्ता की पोल खुलती
है और हैंडपंप दगा देते हैं, तो आम लोगों के लिए दिक्कतें शुरू हो जाती है।
ज्ञात हो कि कुओं का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है और ऐसे में हैंडपंप
ही पेयजल के लिए सबसे सुलभ एवं आसान माध्यम है।
पर, बड़ी तादाद में खराब
होेने वाले हैंडपंपों के प्रति होने वाली लापरवाही गर्मी के मौसम में
लोगों को मुश्किल में डाल देती है, क्योंकि गर्मी के मौसम में पेयजल की खपत
ठंड केे मौसम की अपेक्षा कई गुना तक अधिक बढ़ जाती है। गर्मी का मौसम शुरू
होने वाला है और खराब पड़े हैंडपंप जिम्मेदारों को आईना दिखा रहे है।
सूत्रों की माने तो जिले भर में 2 हजार से अधिक हैंडपंप खराब पड़े हुए है
और जिम्मेदार बेखबर बने हुए है। उधर, पेयजल योजना का नोडल एजेंसी है। ऐसे
में किसी भी योजना में जिले में लगने वाले हैंडपंपों आदि की जानकारी
संबंधित कार्यदायी संस्था को जल निगम को देनी चाहिए, पर कार्यदायी संस्थाओं
ने जानकारी नहीं दी है।
जिससे यही पता नहीं चल पा रहा कि पिछले 15 वर्षों
में सांसद और विधायक निधि से कितने हैंडपंप जिले में लगाए गए हैं। उधर,
सूत्रों की माने तो पिछले 15 वर्षों में सांसद एवं विधायक निधि से
हैंडपंपों के लिए करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि कई कार्यदायी
संस्थाओं को दी गई।
इस धनराशि से कितने हैंडपंप लगे और कहां लगे हैं, इसकी
जानकारी पेयजल की नोडल एजेंसी जल निगम को नहीं है। सूत्रों का कहना है कि
कार्यदायी संस्थाओं के खेल में हैंडपंप फेल हो गए और इसी कारण कार्यदायी
संस्थाओं से इस बारे में सूचना नहीं मिल पाती है।